आज के व्रत-नियम

आज के व्रत-नियम — 23 जुलाई 2026, गुरुवार (गुरु/विष्णु वार)

कैलाश नाथ द्विवेदी ·

[समीक्षक हेतु: प्रकाशन से पूर्व किसी प्रामाणिक पंचांग से तिथि-नक्षत्र अवश्य मिलान करें]

आज गुरुवार है — आज के व्रत-नियम में जानें भगवान विष्णु और बृहस्पति देव की उपासना से जुड़ी परंपरागत विधि। आज आषाढ़ शुक्ल नवमी तिथि प्रातः तक रहकर दशमी में बदल रही है।

गुरुवार का व्रत — भगवान विष्णु व बृहस्पति देव

परंपरा में गुरुवार का दिन भगवान विष्णु और बृहस्पति देव को समर्पित माना जाता है। इस दिन का व्रत ज्ञान, गुरु-कृपा और घर में सुख-समृद्धि के लिए रखा जाता है। कई घरों में गुरुवार का व्रत विशेषकर विद्यार्थियों और नई शुरुआत करने वालों के लिए शुभ माना जाता है, क्योंकि बृहस्पति देव को ज्ञान व बुद्धि के कारक देवता के रूप में पूजा जाता है।

पूजा विधि (संक्षेप में)

  • प्रातः स्नान कर पीले वस्त्र धारण करने की परंपरा है।
  • भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र के समक्ष पीले फूल, हल्दी व चने की दाल अर्पित करें।
  • विष्णु सहस्रनाम या बृहस्पति चालीसा का पाठ करने की परंपरा है।
  • घी का दीपक जलाकर आरती करें, और संभव हो तो व्रत कथा सुनें।
  • शाम को केले के पेड़ की जड़ में जल व हल्दी अर्पित करने की भी परंपरा कई परिवारों में प्रचलित है।

तिथि की स्थिति

आज आषाढ़ शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि प्रातः लगभग 07:04 बजे तक रहेगी, इसके बाद दशमी तिथि आरंभ हो जाएगी। यह कोई विशेष प्रमुख व्रत-तिथि नहीं है, इसलिए आज मुख्य रूप से गुरुवार के साप्ताहिक व्रत-नियम का पालन करने की परंपरा है। कुछ दिनों बाद आषाढ़ माह की देवशयनी एकादशी आने वाली है, जिसकी सही तिथि हम आने वाले दिनों के पंचांग व व्रत-नियम लेख में स्पष्ट करेंगे — जो लोग तैयारी करना चाहें, वे आज से ही धीरे-धीरे सात्विक भोजन अपना सकते हैं।

क्या अपनाएँ, क्या न करें

  • क्या अपनाएँ: पीले वस्त्र, चने की दाल व गुड़ का भोग, सात्विक भोजन।
  • क्या अपनाएँ: बड़ों व गुरुजनों का आशीर्वाद लें, विद्या व ज्ञान से जुड़े कार्य आज शुभ माने जाते हैं।
  • किससे बचें: परंपरा में आज बाल कटवाने व नाखून काटने से बचने की सलाह दी जाती है।
  • किससे बचें: तामसिक भोजन व वाद-विवाद से दूर रहने की सीख दी जाती है।

ध्यान रहे, यह जानकारी परंपरा और सामान्य मान्यताओं पर आधारित है। व्रत व पूजा से जुड़े नियम क्षेत्र व परिवार-परंपरा अनुसार भिन्न हो सकते हैं, अतः स्थानीय पंडित या पारिवारिक परंपरा अनुसार ही निर्णय लें।

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