आज के व्रत-नियम — 19 जुलाई 2026, रविवार (आषाढ़ शुक्ल षष्ठी)
[समीक्षक हेतु: प्रकाशन से पूर्व किसी प्रामाणिक पंचांग से तिथि-नक्षत्र अवश्य मिलान करें]
आज रविवार है और तिथि है आषाढ़ शुक्ल षष्ठी। परंपरा में यह दोनों ही दिन विशेष पूजा-व्रत से जुड़े माने जाते हैं।
रविवार — सूर्य देव की उपासना
सप्ताह के हर रविवार को सूर्य देव की आराधना का दिन माना जाता है। शास्त्रों में बताया गया है कि सूर्योदय के समय ताम्र पात्र से जल में लाल फूल और थोड़ा रोली मिलाकर सूर्य को अर्घ्य देना चाहिए। इस दिन नमक कम खाने और सात्विक भोजन की परंपरा है। कुछ लोग रविवार को बाल न कटवाने और मांसाहार से दूर रहने की परंपरा का पालन करते हैं।
स्कंद षष्ठी — भगवान कार्तिकेय की आराधना
शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को पारंपरिक रूप से स्कंद षष्ठी कहा जाता है, जो भगवान कार्तिकेय (स्कंद) को समर्पित है। परंपरा में मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से पूजा करने पर साहस, विवेक और संकटों से लड़ने की शक्ति मिलती है।
पूजा विधि (संक्षेप में)
- प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- भगवान कार्तिकेय या शिव-पार्वती परिवार की तस्वीर के सामने दीप जलाएँ।
- लाल फूल और मौसमी फल अर्पित करें।
- यथाशक्ति एक समय फलाहार या सात्विक भोजन का नियम रखें।
व्रत के दौरान क्रोध, कटु वचन और तामसिक भोजन से बचने की सलाह परंपरा में दी जाती है, क्योंकि व्रत का मूल उद्देश्य मन को संयमित और शुद्ध रखना माना गया है।
ये सभी नियम पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित हैं; अपने घर की परंपरा या पुरोहित के अनुसार पालन करें। मंदिर में आज होने वाली आरती व कार्यक्रम की जानकारी के लिए मंदिर पृष्ठ देखें, और नियमित व्रत-नियम पाने हेतु रजिस्ट्रेशन करें।