आज के व्रत-नियम — 17 जुलाई 2026, शुक्रवार (आषाढ़ शुक्ल तृतीया-चतुर्थी)
[समीक्षक हेतु: प्रकाशन से पूर्व किसी प्रामाणिक पंचांग से तिथि-नक्षत्र अवश्य मिलान करें]
आज शुक्रवार है, और साथ ही आषाढ़ शुक्ल चतुर्थी तिथि प्रातः लगभग 6:28 बजे से पूरे दिन प्रभावी रहेगी (इससे पहले प्रातःकाल संक्षिप्त समय के लिए तृतीया तिथि रहेगी)। आइए जानें आज के परंपरागत व्रत-नियम।
शुक्रवार — देवी उपासना का दिन
परंपरा में शुक्रवार का दिन देवी शक्ति, विशेषकर संतोषी माता और आदिशक्ति की पूजा के लिए शुभ माना गया है। इस दिन के सामान्य नियम:
- प्रातः स्नान के बाद देवी की प्रतिमा या चित्र के समक्ष दीपक और अगरबत्ती जलाएं।
- श्वेत या लाल वस्त्र धारण करना शुभ माना जाता है।
- संतोषी माता व्रत रखने वाले श्रद्धालु खट्टी वस्तुओं से परहेज़ करने की परंपरा निभाते हैं।
- गुड़-चने का भोग व प्रसाद विशेष रूप से चढ़ाया जाता है।
आषाढ़ शुक्ल चतुर्थी — विनायक चतुर्थी
प्रत्येक माह की शुक्ल पक्ष चतुर्थी परंपरा में "विनायक चतुर्थी" के नाम से भगवान गणेश को समर्पित मानी जाती है। इसके सामान्य नियम:
- प्रातः गणेश जी की प्रतिमा को स्नान कराकर, दूर्वा और मोदक का भोग अर्पित करने की परंपरा है।
- कुछ श्रद्धालु इस दिन एक समय भोजन कर उपवास रखते हैं, वहीं कुछ केवल फलाहार लेते हैं — यह प्रत्येक की श्रद्धा और सामर्थ्य पर निर्भर है।
- गणेश जी को "गं गणपतये नमः" मंत्र के जाप से प्रसन्न करने की मान्यता है।
- इस दिन नए कार्य का शुभारंभ करना विघ्नहर्ता गणेश जी की कृपा से निर्विघ्न माना जाता है।
ध्यान रखने योग्य बातें
व्रत के दौरान मन में शांति और सात्विकता बनाए रखना, वाणी में संयम रखना, और किसी का अपमान न करना — यह हर व्रत-उपवास की मूल भावना मानी गई है। शास्त्र व्रत को केवल भोजन के त्याग तक सीमित नहीं, बल्कि मन की शुद्धि का माध्यम बताते हैं।
व्रत व मुहूर्त का सटीक समय स्थान अनुसार भिन्न हो सकता है, अतः अपने नज़दीकी मंदिर के पुजारी से परामर्श अवश्य करें।
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