आज के व्रत-नियम

आज के व्रत-नियम — 16 जुलाई 2026, गुरुवार (आषाढ़ शुक्ल द्वितीया-तृतीया)

कैलाश नाथ द्विवेदी ·

[समीक्षक हेतु: प्रकाशन से पूर्व किसी प्रामाणिक पंचांग से तिथि-नक्षत्र अवश्य मिलान करें]

16 जुलाई 2026, गुरुवार को आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि प्रातः 08:53 बजे तक है, इसके बाद तृतीया तिथि लगेगी। आज कोई प्रमुख नामित व्रत (जैसे एकादशी, प्रदोष, पूर्णिमा) नहीं है, पर गुरुवार का साप्ताहिक व्रत परंपरा में विशेष माना जाता है।

गुरुवार व्रत — विष्णु व बृहस्पति की उपासना

परंपरा में गुरुवार का दिन भगवान विष्णु और बृहस्पति देव (गुरु ग्रह) को समर्पित माना जाता है। इस दिन व्रत रखने वाले श्रद्धालु सुबह स्नान के बाद पीले वस्त्र धारण करते हैं और भगवान विष्णु की पूजा करते हैं।

पूजा विधि (संक्षेप में)

  • स्नान के बाद स्वच्छ, संभव हो तो पीले वस्त्र पहनें।
  • भगवान विष्णु व बृहस्पति देव की तस्वीर या मूर्ति के सामने घी का दीपक जलाएँ।
  • पीले फूल, चने की दाल और गुड़ अर्पित करने की परंपरा है।
  • विष्णु सहस्रनाम या विष्णु चालीसा का पाठ शुभ माना जाता है।
  • शाम को कथा सुनने और केले के पेड़ में जल चढ़ाने की भी परंपरा है।

परंपरागत रूप से क्या करें

  • पीले या हल्के रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है।
  • ज़रूरतमंदों को पीली वस्तुएँ जैसे चने की दाल, गुड़ और पीले वस्त्र दान करने की परंपरा है।
  • सात्विक भोजन ग्रहण करना उचित माना जाता है।

परंपरागत रूप से किससे बचें

  • व्रत रखने वाले सामान्यतः इस दिन नमक का सेवन कम या त्याग करते हैं — यह हर परिवार की अपनी परंपरा पर निर्भर करता है।
  • बाल कटवाना और नाखून काटना इस दिन वर्जित माना जाता है।
  • क्रोध और वाद-विवाद से बचने की सलाह दी जाती है।

व्रत क्यों रखा जाता है

परंपरा में माना जाता है कि बृहस्पति देव को ज्ञान, बुद्धि और गुरु-तत्व का कारक माना गया है। इसलिए गुरुवार का व्रत विशेष रूप से विद्यार्थियों, शिक्षकों और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करने वालों के लिए उपयुक्त बताया जाता है। जिन घरों में सप्ताह में एक भी व्रत रखने की परंपरा हो, वहाँ गुरुवार को इसके लिए उपयुक्त दिन माना जाता है — हालाँकि व्रत रखना या न रखना पूरी तरह व्यक्तिगत श्रद्धा और स्वास्थ्य की स्थिति पर निर्भर करता है।

आगे की तिथियों पर एक नज़र

पंचांग गणना के अनुसार आषाढ़ मास की देवशयनी एकादशी लगभग 25 जुलाई 2026 को पड़ने की संभावना है, जिससे चातुर्मास आरंभ होगा। सटीक तिथि की पुष्टि निकट आने पर हमारे पंचांग लेखों में की जाएगी।

व्रत और पूजा-विधि से जुड़ी अधिक जानकारी के लिए हमारे मंदिरों में पधारें, और आगामी कार्यक्रमों की जानकारी लेते रहें। ये सभी नियम परंपरा और सामान्य लोक-रीति पर आधारित हैं — पूजा-विधि में अपने परिवार या मंदिर पुरोहित की परंपरा को प्राथमिकता दें।

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