आज के व्रत-नियम — 13 जुलाई 2026, सोमवार (मासिक शिवरात्रि)
[समीक्षक हेतु: प्रकाशन से पूर्व किसी प्रामाणिक पंचांग से तिथि-नक्षत्र अवश्य मिलान करें]
आज सोमवार है और साथ ही आषाढ़ मास की कृष्ण चतुर्दशी तिथि भी — यानी आज का दिन भगवान शिव की आराधना के लिए दोहरे रूप से विशेष माना जाता है।
सोमवार व्रत — शिव आराधना का दिन
परंपरा में सोमवार भगवान शिव को समर्पित माना जाता है। इस दिन व्रत रखने वाले श्रद्धालु प्रातः स्नान के बाद शिवलिंग पर जल, दूध और बेलपत्र अर्पित करते हैं। "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का जाप शुभ माना जाता है। संध्या समय आरती के बाद ही फलाहार या सादा भोजन ग्रहण करने की परंपरा है।
मासिक शिवरात्रि — आज की तिथि का विशेष महत्व
हर माह की कृष्ण पक्ष चतुर्दशी को मासिक शिवरात्रि कहा जाता है, और आज यही तिथि है। परंपरा में इसे शिव-पूजा के लिए अत्यंत शुभ माना गया है। शास्त्र-परंपरा के अनुसार इस दिन के प्रमुख नियम इस प्रकार हैं:
- प्रातः जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- शिवलिंग का जल, दूध, दही, शहद और बेलपत्र से अभिषेक करने की परंपरा है।
- रात्रि जागरण और चारों प्रहर की पूजा को विशेष महत्व दिया जाता है, जिसमें हर प्रहर शिवलिंग का अभिषेक दोहराया जाता है।
- दिनभर उपवास रखकर संध्या या अगले दिन सूर्योदय के बाद व्रत खोलने की परंपरा है — क्षमता अनुसार फलाहार भी उचित माना जाता है।
- क्रोध, कटु वचन और तामसिक भोजन (मांस, मदिरा, प्याज़-लहसुन युक्त भोजन) से आज दूर रहने की सलाह दी जाती है।
व्रत में क्या खाएँ
जो श्रद्धालु निर्जल व्रत नहीं रख पाते, वे परंपरा में फलाहार के रूप में फल, साबूदाना, कुट्टू का आटा, सिंघाड़े का आटा, दूध और सेंधा नमक से बना भोजन ले सकते हैं। अनाज, चावल और सामान्य नमक इस दिन टाला जाता है।
क्या करें, क्या न करें
अपनाएँ: सादगी, क्षमा भाव, सेवा और शांत मन से पूजा।
टालें: अनावश्यक विवाद, तामसिक भोजन, और पूजा में जल्दबाज़ी।
शाम होते ही आज अमावस्या तिथि आरंभ हो जाएगी, इसलिए पूजा और व्रत का समय अपने पारिवारिक पुरोहित या स्थानीय पंचांग से अवश्य पुष्टि कर लें।
व्रत विधि और मुहूर्त की पूर्ण जानकारी के लिए आज का पंचांग लेख देखें, सामूहिक पूजा में भाग लेने हेतु कार्यक्रम देखें, या रजिस्ट्रेशन करके हमारी सामुदायिक सूचनाएँ पाएँ।