आज के व्रत-नियम — रविवार, आषाढ़ कृष्ण त्रयोदशी व प्रदोष व्रत (12 जुलाई 2026)
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आज रविवार है और साथ ही आषाढ़ कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि भी है — यानी आज दो परंपराएं एक साथ आ रही हैं: रविवार का सूर्य-व्रत और त्रयोदशी का प्रदोष व्रत। आइए दोनों के बारे में सरल भाषा में जानते हैं।
रविवार: सूर्य देव की उपासना का दिन
परंपरा में रविवार को सूर्य देव को समर्पित माना जाता है। इस दिन सूर्योदय के समय ताम्र पात्र से जल में लाल फूल और अक्षत डालकर सूर्य को अर्घ्य देने की परंपरा है। साथ ही "ॐ सूर्याय नमः" या आदित्य हृदय स्तोत्र के पाठ को शुभ माना जाता है। सादा, सात्विक भोजन और लाल वस्त्र धारण करना परंपरा में शुभ माना जाता है।
त्रयोदशी: प्रदोष व्रत
आज की तिथि त्रयोदशी है, जो परंपरा में प्रदोष व्रत के लिए जानी जाती है। यह व्रत भगवान शिव को समर्पित है और सूर्यास्त से पहले व बाद के लगभग डेढ़-डेढ़ घंटे के समय, यानी प्रदोष काल में, विशेष पूजा का विधान परंपरा में बताया गया है।
पूजा विधि (संक्षेप में)
- दिन भर हल्का सात्विक भोजन लें या यथाशक्ति उपवास रखें, ऐसा परंपरा में माना जाता है।
- सायंकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- प्रदोष काल में शिवलिंग पर जल, दूध और बेलपत्र अर्पित करें।
- "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का जाप या शिव चालीसा का पाठ करें।
- दीपक जलाकर आरती करें और शांत मन से कुछ समय बैठें।
क्या अपनाएं, क्या टालें
परंपरा में इस दिन सात्विक भोजन अपनाना और क्रोध, वाद-विवाद व झूठ बोलने से बचना बताया गया है। तामसिक भोजन, नशा और अनावश्यक कटु वचन इस दिन टालना उचित माना जाता है। घर के बड़े-बुजुर्ग अक्सर इस दिन शाम को दीया जलाकर पूरे परिवार के साथ बैठने की सलाह देते हैं, ताकि दिन भर की भागदौड़ के बाद मन शांत हो सके।
रविवार और त्रयोदशी एक साथ — क्यों खास
जब सूर्य का वार और शिव-प्रिय तिथि एक ही दिन पड़ें, तो परंपरा में इसे दोहरे संकल्प का दिन माना जाता है — सुबह सूर्य को अर्घ्य देकर दिन की शुरुआत करें, और शाम को प्रदोष काल में शिव आराधना से दिन का समापन करें। इस तरह पूरा दिन ही एक तरह से साधना का रूप ले लेता है, बिना किसी बड़े आयोजन की जरूरत के।
यह जानकारी परंपरा और सामान्य पूजा-पद्धति पर आधारित है; अंतिम निर्णय व विशेष विधि के लिए अपने घर के पुरोहित या मंदिर के पुजारी से परामर्श लें। पूजा से जुड़ी सामग्री के लिए हमारा स्टोर देखें, मंदिर दर्शन की जानकारी के लिए मंदिर पेज देखें, और आगामी शिव पूजा आयोजनों के लिए कार्यक्रम पेज पर नज़र रखें।