आज के व्रत-नियम

आज के व्रत-नियम — 11 जुलाई 2026, शनिवार (शनि वार व योगिनी एकादशी)

कैलाश नाथ द्विवेदी ·

[समीक्षक हेतु: प्रकाशन से पूर्व किसी प्रामाणिक पंचांग से तिथि-नक्षत्र अवश्य मिलान करें]

आज शनिवार है, और साथ ही आज सूर्योदय के समय आषाढ़ माह की कृष्ण पक्ष एकादशी तिथि भी विद्यमान है — इसलिए आज का दिन दो दृष्टि से विशेष माना जाता है।

शनिवार का व्रत

परंपरा में शनिवार को शनि देव और हनुमान जी दोनों की उपासना का दिन माना जाता है। शास्त्र कहते हैं कि इस दिन सच्चे मन से परिश्रम, अनुशासन और नियमितता का पालन करने वाले व्यक्ति पर शनि देव की कृपा बनी रहती है।

  • क्या करें: प्रातः स्नान के बाद शनि देव और हनुमान जी के समक्ष दीपक जलाएं, तेल का दान करें, ज़रूरतमंदों को भोजन या वस्त्र दान करें।
  • क्या टालें: इस दिन क्रोध, आलस्य और किसी का अपमान करने से बचने की सलाह परंपरा में दी जाती है।

योगिनी एकादशी (आषाढ़ कृष्ण एकादशी)

आज की एकादशी तिथि को परंपरा में योगिनी एकादशी कहा जाता है, जो भगवान विष्णु को समर्पित है। धार्मिक मान्यता है कि इस व्रत को श्रद्धापूर्वक करने से मन को शांति और संकल्प-शक्ति मिलती है।

व्रत में क्या खाएं-टालें

  • परंपरा में इस दिन अन्न (चावल, गेहूं आदि) का त्याग कर फलाहार करने की प्रथा है — फल, साबूदाना, कुट्टू या सिंघाड़े के आटे जैसी सामग्री ली जा सकती है।
  • तामसिक भोजन, प्याज़-लहसुन और बासी भोजन से परहेज़ बताया गया है।
  • व्रत का पारण अगले दिन उचित समय पर करने की परंपरा है — पारण का सटीक समय स्थानीय पंडित या प्रामाणिक पंचांग से अवश्य पूछ लें।

पूजा विधि (संक्षेप में)

  1. प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  2. भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र के समक्ष दीपक जलाएं, तुलसी दल अर्पित करें (तुलसी न हो तो केवल पुष्प अर्पित करें)।
  3. विष्णु सहस्रनाम या ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जप करें।
  4. यथाशक्ति दान करें और संध्या समय पुनः दीपक जलाएं।

याद रखें, व्रत और उपवास परंपरा से जुड़ी आस्था के विषय हैं। जिन्हें कोई स्वास्थ्य समस्या है, बुज़ुर्ग हैं या चिकित्सक ने उपवास से मना किया है, वे अपनी सुविधा और स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें — केवल श्रद्धा-भाव से भी पूजा की जा सकती है।

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