स्वास्थ्य एवं योग

स्वास्थ्य एवं योग: वर्षा ऋतु में भुजंगासन, भ्रामरी प्राणायाम और आंवले से रखें सेहत का ख्याल

सोनी मिश्रा ·

बारिश का मौसम चल रहा है — बाहर हल्की फुहारें, पर शरीर के भीतर पाचन-अग्नि थोड़ी मंद पड़ जाती है। आयुर्वेद के अनुसार माना जाता है कि वर्षा ऋतु में शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता स्वाभाविक रूप से कमज़ोर होती है, इसलिए इस मौसम में खान-पान और दिनचर्या पर विशेष ध्यान देने की परंपरा रही है।

ऋतुचर्या: वर्षा ऋतु की सीख

परंपरा में वर्षा ऋतु को "विसर्ग काल" का हिस्सा माना गया है, जब शरीर को हल्का, ताज़ा और आसानी से पचने वाला भोजन चाहिए। कच्चा, बासी या बहुत भारी भोजन इस मौसम में टालने की सलाह दी जाती रही है।

आज का आसन: भुजंगासन

भुजंगासन (कोबरा पोज़) रीढ़ की हड्डी को लचीला रखता है और पाचन तंत्र को सक्रिय करने में सहायक माना जाता है।

  • पेट के बल लेटें, हथेलियां कंधों के नीचे रखें।
  • सांस भरते हुए धीरे-धीरे छाती ऊपर उठाएं, कोहनी हल्की मुड़ी रहे।
  • कुछ सांस रुकें, फिर धीरे से वापस आएं। इसे 3-4 बार दोहराएं।

जिन्हें कमर या पीठ की गंभीर समस्या हो, वे यह आसन किसी योग्य शिक्षक की सलाह से ही करें।

प्राणायाम: भ्रामरी

भ्रामरी प्राणायाम (भंवरे जैसी गुनगुनाहट वाली सांस) मन को शांत करने और तनाव कम करने में सहायक माना जाता है — बरसात के उमस भरे दिनों में यह विशेष रूप से राहतदायक अनुभव होता है। शांत बैठें, कानों को हल्के से बंद करें, गहरी सांस लें और छोड़ते समय "हम्म" की गुनगुनाहट करें। 5-7 बार दोहराएं।

भोजन: आंवला

इस मौसम में ताज़ा आंवला — कच्चा, मुरब्बे के रूप में या चटनी में — परंपरागत रूप से लिया जाता रहा है। इसे विटामिन-सी से भरपूर माना जाता है और आयुर्वेद में इसे रसायन (शरीर को पुष्ट करने वाला) गुणों वाला बताया गया है।

दिनचर्या: छोटे-छोटे नियम

वर्षा ऋतु में परंपरागत रूप से यह भी माना जाता है कि पाचन शक्ति दिन के मुकाबले धीमी रहती है, इसलिए भोजन के बीच पर्याप्त अंतर रखना और ज़रूरत से ज़्यादा न खाना अच्छा रहता है। खाने में अदरक, हींग, जीरा जैसे मसालों का हल्का प्रयोग पाचन में सहायक माना गया है। साथ ही, दिन में सोने से बचने और रात को समय पर सोने की सलाह पुरानी दिनचर्या में दी जाती रही है।

क्या अपनाएं, क्या टालें

  • अपनाएं: गुनगुना पानी, हल्का सुपाच्य भोजन, समय पर सोना-जागना, हल्की सैर, ताज़े मौसमी फल।
  • टालें: बहुत तला-भुना या बासी भोजन, बारिश में भीगकर देर तक गीले कपड़ों में रहना, बासी या कटे हुए फल-सब्ज़ी देर तक खुले रखना।

यह जानकारी सामान्य कल्याण की परंपरागत समझ पर आधारित है, चिकित्सकीय सलाह नहीं। किसी स्वास्थ्य समस्या में चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें। ऐसे ही स्वास्थ्य-संबंधी लेखों के लिए हमारा ब्लॉग देखें, और मंदिर परिसर में होने वाले योग सत्रों की जानकारी के लिए कार्यक्रम पृष्ठ देखते रहें।

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