स्वास्थ्य एवं योग

स्वास्थ्य एवं योग: वर्षा ऋतु में त्रिकोणासन और सोंठ-तुलसी काढ़े से रखें सेहत का ख्याल

सोनी मिश्रा ·

बारिश का मौसम राहत तो देता है, पर साथ में सुस्ती और भारीपन भी लाता है। आयुर्वेद में इसे स्वाभाविक माना जाता है — वर्षा ऋतु में शरीर की पाचन अग्नि (अग्नि) मंद पड़ जाती है, इसलिए इन दिनों खान-पान और दिनचर्या में थोड़ा बदलाव करना ज़रूरी होता है।

वर्षा ऋतुचर्या: आयुर्वेद की सलाह

परंपरा में माना जाता है कि इस मौसम में शरीर हल्का, गर्म और आसानी से पचने वाला भोजन चाहता है। कच्ची सब्ज़ियाँ, सलाद और बासी भोजन से जितना बचा जाए उतना अच्छा। इसके बजाय ताज़ा पका, हल्का मसालेदार और गुनगुना भोजन इस मौसम में शरीर के लिए अनुकूल माना जाता है। पानी भी हमेशा उबालकर, गुनगुना पीने की सलाह दी जाती है।

क्या अपनाएं

  • ताज़ा, गरम और हल्का सात्विक भोजन।
  • अदरक, हल्दी, काली मिर्च जैसे मसालों का संतुलित उपयोग — ये पाचन में सहायक माने जाते हैं।
  • गुनगुना पानी और हर्बल काढ़े।

क्या टालें

  • कच्चा सलाद, बासी भोजन और सड़क किनारे का खुला खाना।
  • बहुत ठंडी या बहुत तली-भुनी चीज़ें, विशेषकर रात में।

आज का अभ्यास: त्रिकोणासन

त्रिकोणासन (त्रिकोण मुद्रा) पाचन तंत्र को सक्रिय करने और शरीर में हल्कापन लाने में सहायक माना जाता है।

  1. दोनों पैरों में लगभग तीन फुट की दूरी बनाकर सीधे खड़े हों।
  2. दायाँ पैर बाहर की ओर मोड़ें, दोनों हाथ कंधों की सीध में फैलाएँ।
  3. साँस छोड़ते हुए कमर से झुकें, दायाँ हाथ दाएँ पैर या टखने तक ले जाएँ, बायाँ हाथ ऊपर आकाश की ओर सीधा रखें।
  4. नज़र ऊपर की ओर, कुछ गहरी साँसों तक इसी मुद्रा में रहें, फिर धीरे से सीधे हो जाएँ और दूसरी ओर से दोहराएँ।

जिन्हें कमर या रीढ़ से जुड़ी कोई पुरानी तकलीफ हो, वे यह आसन किसी योग शिक्षक के मार्गदर्शन में ही करें।

आज का काढ़ा: सोंठ-तुलसी काढ़ा

एक गिलास पानी में एक चुटकी सोंठ (सूखा अदरक पाउडर) और चार-पाँच तुलसी के पत्ते डालकर धीमी आँच पर उबालें, जब तक पानी आधा न रह जाए। छानकर गुनगुना ही पिएँ। परंपरा में यह काढ़ा वर्षा ऋतु में पाचन और गले की आराम के लिए सहायक माना जाता है।

ध्यान दें: यह जानकारी परंपरागत आयुर्वेदिक समझ पर आधारित सामान्य जीवनशैली सुझाव है, यह चिकित्सीय सलाह नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या में चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें।

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