स्वास्थ्य एवं योग: वर्षा ऋतु में गोमुखासन और अजवाइन-सौंफ के पानी से रखें सेहत का ख्याल
बारिश के इस मौसम में अक्सर घुटनों और कंधों में हल्की अकड़न महसूस होती है, और भोजन के बाद पेट भारी-सा लगता है। आयुर्वेद के अनुसार यह वर्षा ऋतु में वात दोष के बढ़ने और जठराग्नि (पाचन शक्ति) के कमज़ोर पड़ने का सामान्य लक्षण माना जाता है।
आज का आसन: गोमुखासन
गोमुखासन (Cow Face Pose) कंधों, बाहों और छाती को खोलने वाला सरल आसन है, जो वर्षा ऋतु में शरीर की जकड़न कम करने में सहायक माना जाता है।
- ज़मीन पर पालथी मारकर बैठें, एक पैर को दूसरे के ऊपर घुटने से मोड़ें ताकि दोनों घुटने एक-दूसरे के ऊपर आ जाएं।
- एक हाथ को ऊपर से और दूसरे को नीचे से पीठ के पीछे ले जाकर उंगलियां आपस में जोड़ने का प्रयास करें।
- रीढ़ सीधी रखें, गहरी सांस लेते हुए 20-30 सेकंड इस मुद्रा में रहें, फिर दूसरी ओर से दोहराएं।
ध्यान रहे — जोड़ों में पहले से तकलीफ हो तो जबरदस्ती खिंचाव न करें, आसन को अपनी सुविधा अनुसार ही करें।
आज का सात्विक उपाय: अजवाइन-सौंफ का पानी
परंपरा में माना जाता है कि वर्षा ऋतु में अजवाइन और सौंफ को हल्का भूनकर, रातभर पानी में भिगोकर सुबह छानकर पीने से पाचन हल्का बना रहता है। यह भारी और तली-भुनी चीज़ों से बचकर, हल्के, गर्म और ताज़ा पके भोजन को प्राथमिकता देने की दिनचर्या का ही हिस्सा है।
आज क्या अपनाएं
- भोजन गुनगुना और ताज़ा बना हुआ खाएं, बासी भोजन से बचें।
- सुबह खाली पेट हल्का गुनगुना पानी और अजवाइन-सौंफ का पानी लें।
- गोमुखासन जैसे हल्के आसन और गहरी श्वास (प्राणायाम) को दिनचर्या में शामिल करें।
आज क्या टालें
- सड़क किनारे के कटे-खुले फल और तली हुई चीज़ें — मानसून में संक्रमण का खतरा अधिक माना जाता है।
- बहुत ठंडा पानी या फ्रिज का भोजन।
- देर रात भारी भोजन करना।
ध्यान रखें, यह जानकारी सामान्य पारंपरिक और आयुर्वेदिक जीवनशैली पर आधारित है, किसी चिकित्सकीय सलाह का विकल्प नहीं है — किसी भी स्वास्थ्य समस्या में योग्य चिकित्सक से संपर्क करें। स्वस्थ जीवनशैली से जुड़े ऐसे और लेख पढ़ने के लिए अन्य लेख देखें और अपने नज़दीकी मंदिर में सत्संग का हिस्सा बनें।