स्वास्थ्य एवं योग: वर्षा ऋतु में वज्रासन और हल्दी वाले दूध से रखें पाचन का ख्याल
बारिश के इस मौसम में खाना खाने के बाद अक्सर पेट भारी-भारी सा लगता है। आयुर्वेद के अनुसार माना जाता है कि वर्षा ऋतु में जठराग्नि (पाचन-शक्ति) स्वाभाविक रूप से मंद पड़ जाती है, इसलिए इस मौसम में भोजन और योग दोनों में हल्केपन का ध्यान रखना ज़रूरी होता है। आइए आज जानते हैं वर्षा ऋतु के लिए एक सरल आसन और एक परंपरागत घरेलू सलाह।
वज्रासन — भोजन के बाद का सरल आसन
वज्रासन एकमात्र ऐसा आसन माना जाता है जिसे भोजन के तुरंत बाद भी किया जा सकता है। इसकी विधि बहुत सरल है:
- दोनों घुटनों को मोड़कर एड़ियों पर बैठें, रीढ़ सीधी रखें।
- हाथ जांघों पर रखें, आँखें बंद कर धीरे-धीरे साँस लें।
- भोजन के बाद 5–10 मिनट इसी मुद्रा में बैठें, जल्दबाज़ी न करें।
परंपरा में माना जाता है कि इससे पाचन क्रिया सहज होती है और पेट में भारीपन कम महसूस होता है। जिन लोगों को घुटनों में तकलीफ हो, वे इसे आराम से या कम समय के लिए करें, और ज़रूरत पड़ने पर अपने अनुभव के अनुसार समायोजित करें।
हल्दी वाला दूध — रात की परंपरागत सलाह
सोने से पहले हल्की गर्म हल्दी वाले दूध को दादी-नानी के ज़माने से एक भरोसेमंद घरेलू सलाह माना जाता रहा है। एक गिलास गुनगुने दूध में चुटकीभर हल्दी और चाहें तो थोड़ी सी काली मिर्च मिलाकर पीने की परंपरा है। इसे "स्वर्ण दूध" भी कहा जाता है और वर्षा ऋतु में शरीर को भीतर से गर्माहट देने वाला माना जाता है।
सात्विक भोजन की सीख
वर्षा ऋतु में सात्विक और हल्के भोजन को प्राथमिकता देने की सलाह दी जाती है — जैसे मूंग दाल की खिचड़ी, उबली सब्ज़ियाँ, गुनगुना पानी। भोजन में अदरक, हींग और जीरे जैसे मसालों का हल्का प्रयोग भी परंपरा में पाचन के लिए सहायक माना जाता है।
क्या अपनाएँ, क्या न करें
- क्या अपनाएँ: हल्का, ताज़ा और गरम भोजन; भोजन के बाद वज्रासन; समय पर सोना-जागना।
- क्या अपनाएँ: दिनभर थोड़ा-थोड़ा गुनगुना पानी पीते रहना।
- किससे बचें: तला-भुना, बासी या बहुत ठंडा भोजन; भारी भोजन के तुरंत बाद लेटना।
- किससे बचें: बरसात में भीगकर तुरंत ठंडा भोजन करने से बचें।
याद रहे, यह सामान्य परंपरागत जानकारी है, किसी चिकित्सकीय सलाह का विकल्प नहीं। कोई भी स्वास्थ्य समस्या हो तो चिकित्सक से अवश्य सलाह लें।
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