स्वास्थ्य एवं योग: वर्षा ऋतु में सेतुबंधासन और अनुलोम-विलोम से पाएँ ऊर्जा
बारिश के दिनों में सुस्ती और भारीपन महसूस होना आम बात है। आयुर्वेद के अनुसार वर्षा ऋतु में जठराग्नि यानी पाचन शक्ति कमज़ोर पड़ जाती है, इसलिए इस मौसम में खान-पान और दिनचर्या दोनों में थोड़ा बदलाव ज़रूरी माना जाता है।
आज का आसन — सेतुबंधासन
पीठ के बल लेटकर घुटने मोड़ें, पैर ज़मीन पर टिकाएँ और कमर को धीरे-धीरे ऊपर उठाएँ ताकि शरीर पुल जैसा आकार बना ले। कुछ साँसों तक रुकें, फिर धीरे से नीचे आएँ। परंपरा में माना जाता है कि यह आसन रीढ़ को लचीला बनाता है और थकान दूर करने में सहायक है। जिन्हें गर्दन या कमर में तकलीफ़ हो, वे योग्य प्रशिक्षक की सलाह से ही अभ्यास करें।
आज का प्राणायाम — अनुलोम-विलोम
सुबह खाली पेट, शांत जगह बैठकर एक नथुना बंद कर दूसरे से साँस लें, फिर नथुना बदलकर छोड़ें। यह क्रम 5-10 मिनट दोहराएँ। योग परंपरा में इसे मन को शांत करने और श्वास पर नियंत्रण बढ़ाने वाला अभ्यास माना जाता है।
सात्विक भोजन की सलाह
वर्षा ऋतु में आयुर्वेद हल्के, गरम और आसानी से पचने वाले भोजन की सलाह देता है। सुबह हल्दी और काली मिर्च मिला गरम दूध, और भोजन में अदरक-नींबू का प्रयोग परंपरा में लाभकारी माना गया है। कच्चा सलाद और बहुत ठंडी चीज़ों से इस मौसम में परहेज़ बेहतर बताया जाता है, क्योंकि इस मौसम में पाचन शक्ति स्वाभाविक रूप से कमज़ोर रहती है।
ध्यान रहे — यह जानकारी सामान्य पारंपरिक ज्ञान पर आधारित है, किसी चिकित्सीय सलाह का विकल्प नहीं। किसी बीमारी में चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें।
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