स्वास्थ्य एवं योग: वर्षा ऋतु में पवनमुक्तासन और शीतली प्राणायाम से रखें सेहत का ख्याल
स्वास्थ्य एवं योग की दृष्टि से वर्षा ऋतु का यह समय पाचन-शक्ति को संभालकर रखने का होता है। आयुर्वेद में माना जाता है कि बारिश के मौसम में शरीर की जठराग्नि (पाचन क्षमता) स्वाभाविक रूप से थोड़ी कमज़ोर पड़ जाती है, इसलिए आज इस मौसम के अनुकूल एक आसन, एक प्राणायाम और भोजन की सामान्य सलाह साझा कर रहे हैं।
पवनमुक्तासन — गैस और भारीपन में सहायक
पवनमुक्तासन को परंपरा में पेट की गैस, भारीपन और अपच से राहत दिलाने वाला आसन माना जाता है। पीठ के बल लेटकर दोनों घुटनों को मोड़कर छाती से लगाना और कुछ सांस रोककर धीरे-धीरे छोड़ना — यह सरल अभ्यास सुबह खाली पेट किया जा सकता है। जिन्हें कमर या घुटने की गंभीर तकलीफ हो, वे यह आसन किसी योग-प्रशिक्षक की सलाह से ही करें।
शीतली प्राणायाम — मानसून में शीतलता
शीतली प्राणायाम में जीभ को थोड़ा मोड़कर मुँह से धीरे-धीरे सांस अंदर ली जाती है और नाक से छोड़ी जाती है। परंपरा में इसे शरीर को ठंडक देने वाला और मन को शांत करने वाला अभ्यास माना गया है। सर्दी-जुकाम या गले में जकड़न होने पर इसे टाल देना ही उचित है।
भोजन में क्या अपनाएँ
- हल्की मूंग दाल की खिचड़ी और सोंठ (सूखी अदरक) मिला गुनगुना पानी परंपरा में सुपाच्य माना जाता है
- ताज़ा और गरम भोजन ही ग्रहण करें, बासी भोजन से दूर रहें
- अजवाइन, जीरा और हल्दी जैसे मसालों को भोजन में शामिल करना परंपरा में पाचन के लिए सहायक माना गया है
क्या टालें
- तली-भुनी, भारी और बासी चीज़ों से मानसून में परहेज़ करने की सलाह दी जाती है
- कच्ची पत्तेदार सब्ज़ियाँ और सड़क किनारे का खुला भोजन इस मौसम में टालना बेहतर माना जाता है
- ठंडा पानी और बर्फ वाली चीज़ों से भी बचने की सलाह परंपरा में दी गई है
आयुर्वेद में ऋतुचर्या का सिद्धांत यही कहता है कि हर मौसम में शरीर की ज़रूरतें बदलती हैं, इसलिए दिनचर्या और भोजन को भी मौसम के अनुसार ढालना चाहिए। वर्षा ऋतु में वातावरण में नमी बढ़ने से शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता भी स्वाभाविक रूप से प्रभावित होती है, इसलिए हल्का भोजन, समय पर सोना-जागना और नियमित योग-अभ्यास परंपरा में विशेष महत्व रखते हैं।
ध्यान रहे, यह जानकारी सामान्य दिनचर्या और आयुर्वेदिक परंपरा पर आधारित है, किसी चिकित्सीय सलाह का विकल्प नहीं है। यदि कोई स्वास्थ्य समस्या हो तो योग्य चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें।
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