स्वास्थ्य एवं योग: वर्षा ऋतु में धनुरासन और सोंठ-अजवाइन की चाय से रखें सेहत का ख्याल
बारिश के इन दिनों में सुबह उठते ही शरीर थोड़ा भारी-सा और मन थोड़ा सुस्त-सा महसूस होता है। यह अकेले आपके साथ नहीं होता — वर्षा ऋतु में जठराग्नि यानी पाचन-शक्ति स्वाभाविक रूप से कमज़ोर मानी जाती है, और आयुर्वेद इसी के अनुसार दिनचर्या बदलने की सलाह देता है।
वर्षा ऋतु में दिनचर्या कैसी हो
आयुर्वेद के अनुसार माना जाता है कि इस मौसम में सुबह जल्दी उठना, हल्का व्यायाम करना और भोजन को समय पर, थोड़ा कम मात्रा में लेना पाचन को संतुलित रखने में सहायक होता है। भीगने के बाद तुरंत शरीर को सुखाकर, गीले कपड़ों में देर तक न रहना — यह परंपरा में सेहत के लिए ज़रूरी बताया गया है।
आज का आसन: धनुरासन
धनुरासन यानी बो पोज़ — पेट के बल लेटकर दोनों टखनों को हाथों से पकड़कर शरीर को धनुष के आकार में मोड़ना। परंपरा में माना जाता है कि इस आसन के नियमित अभ्यास से रीढ़ की लचक बनी रहती है और पाचन तंत्र को हल्की उत्तेजना मिलती है।
- खाली पेट, सुबह के समय अभ्यास करें।
- शुरुआत में शरीर को हल्का ही मोड़ें, ज़बरदस्ती न करें।
- कमर या घुटने में पहले से तकलीफ़ हो तो योग-शिक्षक की सलाह से ही अभ्यास करें।
साथ में कुछ गहरी साँसें और भ्रामरी प्राणायाम मन को शांत करने में सहायक माने जाते हैं।
आज का भोजन: सोंठ-अजवाइन की चाय
वर्षा ऋतु में सात्विक और हल्का भोजन ही श्रेष्ठ माना गया है। सोंठ (सूखा अदरक) और अजवाइन को पानी में उबालकर बनाई गई चाय परंपरागत रूप से पाचन को सहज रखने के लिए पी जाती रहती है। इसके साथ:
- ताज़ा, गरम और हल्का पका भोजन लें, बासी या ठंडा भोजन टालें।
- कच्ची सब्ज़ियों और सलाद की जगह उबली-पकी सब्ज़ियों को प्राथमिकता दें।
- मूंग दाल जैसे हल्के अनाज सुपाच्य माने जाते हैं।
ध्यान रहे: यह जानकारी परंपरा और सामान्य आयुर्वेदिक समझ पर आधारित है, किसी चिकित्सकीय सलाह का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या में योग्य वैद्य या डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें।
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