स्वास्थ्य एवं योग

स्वास्थ्य एवं योग: वर्षा ऋतु में उष्ट्रासन और भ्रामरी प्राणायाम से रखें सेहत का ख्याल

सोनी मिश्रा ·

बारिश के दिनों में शरीर की जठराग्नि (पाचन शक्ति) स्वाभाविक रूप से मंद पड़ जाती है — यह बात आयुर्वेद की ऋतुचर्या में सदियों से कही जाती रही है। ऐसे में सही खान-पान के साथ-साथ सही योगाभ्यास भी उतना ही जरूरी माना जाता है।

वर्षा ऋतु की दिनचर्या

परंपरा में माना जाता है कि वर्षा ऋतु में सूर्योदय के आसपास उठना, हल्का व्यायाम करना और गुनगुना पानी पीना पाचन को संतुलित रखने में सहायक होता है। भीगने से बचना, गीले कपड़े जल्दी बदलना और शरीर को सूखा-गर्म रखना भी दिनचर्या का हिस्सा बताया गया है।

आज का आसन: उष्ट्रासन (ऊँट मुद्रा)

विधि:

  1. घुटनों के बल बैठें, दोनों घुटनों में कंधों जितनी दूरी रखें।
  2. धीरे-धीरे पीछे की ओर झुकें और दोनों हाथों से एड़ियों को पकड़ने का प्रयास करें।
  3. छाती को ऊपर और आगे की ओर खोलें, गर्दन को सहज रहने दें।
  4. सामान्य श्वास के साथ 15-20 सेकंड इस मुद्रा में रहें, फिर धीरे से वापस आएँ।

परंपरा में माना जाता है कि यह आसन रीढ़ को लचीला बनाने और पाचन तंत्र को सक्रिय रखने में सहायक होता है। जिन्हें कमर या गर्दन की गंभीर समस्या हो, वे किसी योग्य प्रशिक्षक की देखरेख में ही इसका अभ्यास करें।

आज का प्राणायाम: भ्रामरी प्राणायाम

विधि:

  1. किसी शांत स्थान पर सुखासन में बैठें, आँखें बंद रखें।
  2. दोनों अंगूठों से कान बंद करें, बाकी उंगलियाँ आँखों और भौंहों पर हल्के से रखें।
  3. गहरी साँस लें, फिर साँस छोड़ते हुए मधुमक्खी जैसी गुनगुनाहट की ध्वनि निकालें।
  4. इसे 5-7 बार दोहराएँ।

यह प्राणायाम मन को शांत करने और तनाव कम करने में सहायक माना जाता है, विशेषकर बरसात के मौसम में जब मौसम बदलने से नींद और मन दोनों अस्थिर हो सकते हैं।

भोजन में सावधानी

आयुर्वेद के अनुसार माना जाता है कि वर्षा ऋतु में हल्का, गर्म और ताज़ा पका भोजन ही उचित है। कच्ची पत्तेदार सब्जियाँ और बासी भोजन से बचना चाहिए, और अदरक-काली मिर्च जैसी चीज़ों को भोजन का हिस्सा बनाना लाभकारी बताया गया है।

जल का ध्यान भी रखें

बारिश के मौसम में पानी की स्वच्छता का विशेष ध्यान रखने की सलाह परंपरा में दी जाती है। उबालकर ठंडा किया हुआ या छना हुआ पानी पीना उचित माना जाता है, ताकि पेट संबंधी तकलीफों से बचा जा सके। साथ ही दिनभर थोड़ा-थोड़ा गुनगुना पानी पीते रहना भी लाभकारी बताया गया है, विशेषकर उन दिनों में जब बाहर उमस अधिक हो और प्यास का एहसास कम होता हो।

ऐसे और स्वास्थ्य-संबंधी लेखों के लिए हमारा ब्लॉग देखें, और मंदिर द्वारा आयोजित योग-सत्रों की जानकारी के लिए कार्यक्रम पेज पर नज़र रखें। ध्यान रहे — यह सामान्य जानकारी है, किसी चिकित्सीय स्थिति में चिकित्सक की सलाह अवश्य लें।

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