स्वास्थ्य एवं योग

स्वास्थ्य एवं योग: वर्षा ऋतु में मार्जरीआसन और हल्के फलाहार से रखें सेहत का ख्याल

सोनी मिश्रा ·

बारिश के इस मौसम में पेट अक्सर भारी-भारी सा लगता है। आयुर्वेद इस मौसम को "वर्षा ऋतु" कहता है, जब जठराग्नि यानी पाचन शक्ति स्वाभाविक रूप से कमज़ोर पड़ जाती है।

ऋतुचर्या: मौसम के अनुसार जीवनशैली

आयुर्वेद के अनुसार माना जाता है कि वर्षा ऋतु में शरीर की वात प्रकृति बढ़ जाती है और अग्नि मंद पड़ जाती है। इसलिए इस मौसम में भारी, तला-भुना और बासी भोजन शरीर पर बोझ डालता है, जबकि हल्का, ताज़ा और गुनगुना भोजन शरीर को संतुलन में रखने में मदद करता है, ऐसा परंपरा में माना जाता है।

आज का योगाभ्यास: मार्जरीआसन (कैट-काऊ पोज़)

आज मार्जरीआसन का अभ्यास करें। घुटनों और हाथों के बल बैठें, साँस भरते हुए पीठ को नीचे झुकाएँ और सिर ऊपर उठाएँ, फिर साँस छोड़ते हुए पीठ को ऊपर की ओर गोल करें और ठुड्डी को छाती की तरफ़ ले जाएँ। इसे 8-10 बार धीरे-धीरे दोहराएँ। यह रीढ़ को लचीला बनाता है, पाचन अंगों की धीरे से मालिश करता है और मन को शांत करता है।

ध्यान रहे — यह सामान्य कल्याण अभ्यास है, किसी चिकित्सीय स्थिति में योग शिक्षक या चिकित्सक की सलाह ज़रूर लें।

प्राणायाम भी करें शामिल

यदि समय हो तो मार्जरीआसन के बाद 5 मिनट दीर्घ श्वास प्राणायाम करें। धीरे गहरी साँस लेना और छोड़ना मन को शांत करता है, और वर्षा ऋतु में होने वाली सुस्ती व भारीपन को कम करने में सहायक माना जाता है।

आज का सात्विक भोजन

  • हल्का मूंग दाल का पानी या पतली खिचड़ी, जिसमें अदरक और जीरा डला हो।
  • मौसमी फल जैसे पपीता या अनार, जो पचने में आसान माने जाते हैं।
  • ठंडा या बासी भोजन, ज़्यादा तला-भुना और बाहर का खाना आज टालें।
  • गुनगुना पानी दिनभर घूंट-घूंट कर पिएँ, ठंडा पानी न पिएँ।

दिनचर्या में एक छोटा बदलाव

आज सूर्योदय के आसपास उठने की कोशिश करें और भोजन के तुरंत बाद न सोएँ। परंपरा में माना जाता है कि भोजन के बाद थोड़ी देर टहलना (शतपावली) पाचन में सहायक होता है। कमरे और कपड़ों को सूखा रखना, गीले पैर लेकर देर तक न बैठना — ये छोटी-छोटी बातें भी वर्षा ऋतु की दिनचर्या का हिस्सा मानी जाती हैं। यह छोटी-छोटी आदतें ही मिलकर पूरे मौसम में सेहत बनाए रखती हैं।

ध्यान का एक क्षण

योगाभ्यास के बाद दो-तीन मिनट आँखें बंद करके बैठें। बारिश की आवाज़ सुनें, साँस पर ध्यान दें, और मन को दिनभर की चिंताओं से थोड़ी देर के लिए मुक्त होने दें। परंपरा में यह भी माना जाता है कि ऐसा नियमित अभ्यास मौसम बदलने के साथ आने वाली मानसिक थकान को कम करने में सहायक होता है।

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