स्वास्थ्य एवं योग

वर्षा ऋतु में पाचन शक्ति और वज्रासन: सात्विक भोजन से सेहत का ख्याल

सोनी मिश्रा ·

बरसात के मौसम में खाना खाने के बाद अक्सर पेट भारी-सा लगता है — यह अकेले आपके साथ नहीं होता। आयुर्वेद के अनुसार माना जाता है कि वर्षा ऋतु में शरीर की जठराग्नि (पाचन शक्ति) स्वाभाविक रूप से कमज़ोर पड़ जाती है, इसलिए इस मौसम में खान-पान और योग दोनों में थोड़ा बदलाव ज़रूरी है।

वर्षा ऋतु में पाचन कमज़ोर क्यों माना जाता है

ऋतुचर्या की परंपरा में वर्षा ऋतु को ऐसा समय बताया गया है जब वात दोष बढ़ता है और अग्नि मंद रहती है। इसी कारण परंपरागत रूप से इस मौसम में हल्का, ताज़ा और गर्म भोजन लेने की सलाह दी जाती रही है, न कि भारी और ठंडा भोजन।

आज का योगासन — वज्रासन

भोजन के बाद वज्रासन में कुछ मिनट बैठना पारंपरिक रूप से पाचन में सहायक माना जाता है। विधि सरल है:

  • घुटनों को मोड़कर एड़ियों पर बैठें, रीढ़ सीधी रखें।
  • हाथ घुटनों पर रखें, आँखें बंद कर धीमी साँस लें।
  • भोजन के 10-15 मिनट बाद 5-10 मिनट तक इसी मुद्रा में बैठें।

साथ ही सुबह खाली पेट कुछ मिनट अनुलोम-विलोम प्राणायाम करना भी परंपरा में शरीर की ऊर्जा संतुलित रखने के लिए सुझाया जाता है। यह प्राणायाम दोनों नथुनों से बारी-बारी साँस लेने और छोड़ने की सरल विधि है, जिसे परंपरा में मन को स्थिर रखने और मौसम बदलने पर शरीर को ढालने में सहायक माना जाता है। शुरुआत में 5 मिनट से भी यह अभ्यास किया जा सकता है, धीरे-धीरे समय बढ़ाया जा सकता है।

सात्विक भोजन में आज क्या अपनाएँ

  • हल्का, ताज़ा पका और गुनगुना भोजन लें — मूंग दाल, लौकी, तोरई जैसी हल्की सब्ज़ियाँ इस मौसम में उपयुक्त मानी जाती हैं।
  • भोजन में सोंठ, हींग और जीरे जैसे मसालों का संतुलित उपयोग पाचन में सहायक माना जाता है।
  • पानी उबालकर, ठंडा करके पीने की परंपरागत सलाह इस मौसम में विशेष महत्व रखती है।

आज किससे बचें

  • कटे हुए फल, सलाद और बासी भोजन से बचें — बरसात में यह जल्दी दूषित हो सकते हैं।
  • रात में दही और भारी तले-भुने भोजन से परहेज़ परंपरा में सुझाया जाता है।
  • बहुत ठंडा पानी या बर्फ वाले पेय पदार्थों से बचें।

दिनचर्या में एक छोटा बदलाव

ऋतुचर्या की परंपरा में यह भी कहा गया है कि वर्षा ऋतु में भोजन के बीच लंबा अंतर रखने की बजाय हल्का भोजन थोड़े-थोड़े अंतराल पर लेना पाचन के लिए बेहतर माना जाता है। साथ ही, दिन में थोड़ी देर खुली हवा में टहलना और शरीर को हल्की गतिविधि देना — भले ही बारिश के कारण बाहर न जा सकें, घर के भीतर ही कुछ स्ट्रेचिंग या हल्का योग अभ्यास शरीर को स्फूर्तिवान बनाए रखता है।

यह लेख सामान्य पारंपरिक जानकारी है, चिकित्सकीय सलाह नहीं — किसी भी स्वास्थ्य समस्या में योग्य वैद्य या डॉक्टर से परामर्श लें।

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