बच्चों की कहानी: ध्रुव की मेहनत — आज स्कूल के डांस ऑडिशन में बार-बार रिजेक्ट होने के बाद भी हार न मानने की सीख
अर्नव तीसरी बार स्कूल के डांस ग्रुप के ऑडिशन में रिजेक्ट हो गया। टीचर ने कहा, "अभी और प्रैक्टिस चाहिए।" घर आकर उसने अपने डांस शूज़ कोने में फेंक दिए — "अब कभी ट्राई नहीं करूँगा।"
दादाजी ने उसे पास बुलाया। "एक राजकुमार की कहानी सुनोगे, जो तुमसे भी छोटा था और उसे भी 'ना' सुनना पड़ा था?"
ध्रुव की कहानी
श्रीमद्भागवत पुराण में कथा आती है — राजा उत्तानपाद के बेटे ध्रुव एक बार पिता की गोद में बैठना चाहते थे। पर सौतेली माँ सुरुचि ने रोक दिया — "इस गोद में बैठने का हक़ उसी को है जिसने मुझसे जन्म लिया हो।" छोटा ध्रुव रोता हुआ अपनी माँ के पास गया। माँ ने समझाया कि रोने से कुछ नहीं मिलेगा, अगर सबसे ऊँचा स्थान चाहिए तो भगवान की भक्ति और मेहनत करनी होगी।
पाँच साल का बच्चा जंगल चला गया और कठिन तपस्या में जुट गया। कई बार हार का मन हुआ, शरीर थक गया, पर उसने अभ्यास नहीं छोड़ा। अंततः भगवान विष्णु प्रसन्न हुए और उसे आकाश में वह स्थान दिया जो कभी नहीं डिगता — ध्रुव तारा, जिसे आज भी रात के आसमान में सबसे स्थिर तारे के रूप में देखा जाता है।
आज की क्लास में भी वही सीख
दादाजी ने अर्नव से कहा, "ध्रुव के पास भी पहली बार में जगह नहीं थी। उसने अभ्यास नहीं छोड़ा, इसलिए आज भी उसका नाम आसमान में चमकता है। तुम्हारा डांस भी वैसे ही मेहनत माँगता है।"
अगले दिन अर्नव ने शूज़ फिर से पहने और रोज़ आधा घंटा अभ्यास शुरू कर दिया। दो महीने बाद जब अगला ऑडिशन आया, टीचर ने मुस्कुराकर उसका नाम लिस्ट में लिख दिया।
सीख: पहली बार में मना होना हार नहीं है, मेहनत छोड़ देना ही असली हार है।
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