बच्चों के लिए कहानियाँ

बच्चों की कहानी: बाल हनुमान की सूरज-छलांग — जब सबसे ताकतवर बच्चा भी खुद पर शक करता है

आनंद दुबे ·

क्या तुमने कभी देखा है कि टीम का सबसे तेज़ गेंदबाज़ भी बड़े मैच से पहले घबरा जाता है? या क्लास का सबसे होशियार बच्चा भी परीक्षा हॉल में एक पल के लिए खुद पर शक करने लगता है? पौराणिक परंपरा की एक बहुत पुरानी कहानी बताती है कि यह सबके साथ होता है — यहाँ तक कि हनुमान जी जैसे शक्तिशाली बालक के साथ भी।

जब बाल हनुमान ने सूरज को समझा फल

हनुमान जी बचपन में बहुत ही चंचल और उछल-कूद वाले बालक थे। एक सुबह उगते सूरज को देखकर उन्हें लगा कि यह कोई लाल, पका हुआ फल है। बस, उन्होंने ज़ोर से छलांग लगा दी — सीधे आकाश की ओर, सूरज को पकड़ने के लिए! उनकी शक्ति इतनी असीम थी कि वे सच में सूरज के पास तक पहुँच गए।

देवराज इंद्र को लगा कि यह कोई संकट है, तो उन्होंने अपने वज्र से बाल हनुमान पर प्रहार किया। हनुमान जी नीचे गिर पड़े। यह देखकर उनके पिता, पवनदेव, इतने क्रोधित हुए कि उन्होंने पूरे संसार से हवा ही रोक दी। हाहाकार मच गया, तब सभी देवताओं ने मिलकर हनुमान जी को अनोखे वरदान दिए — अनगिनत शक्तियाँ, जिनसे वे लगभग अजेय बन गए।

फिर शक्ति क्यों भूल गए?

बाल हनुमान बहुत उपद्रवी थे — खेल-खेल में ऋषियों की तपस्या में विघ्न डाल देते थे। एक दिन ऋषियों ने प्रेमपूर्वक एक शर्त रख दी — तुम अपनी अधिकतर शक्तियाँ भूल जाओगे, और जब कोई सच्चा मित्र या मार्गदर्शक तुम्हें याद दिलाएगा, तभी वे शक्तियाँ फिर जागेंगी। हनुमान जी ने यह बात मान ली, और बड़े होकर वे स्वयं नहीं जानते थे कि वे कितने शक्तिशाली हैं।

बरसों बाद, जब समुद्र पार करके लंका जाने की बारी आई और सब वानर घबरा गए, तब बुज़ुर्ग जाम्बवंत जी ने हनुमान जी के पास जाकर धीरे से याद दिलाया — "तुम वही हो जिसने बचपन में सूरज तक छलांग लगाई थी। तुम्हारी ताकत कभी गई नहीं, बस भूल गई थी।" यह सुनते ही हनुमान जी का आत्मविश्वास लौट आया, और उन्होंने एक ही छलांग में समुद्र पार कर लिया।

सीख

तुम्हारी असली ताकत — चाहे पढ़ाई में हो, खेल में हो या किसी और हुनर में — हमेशा तुम्हारे भीतर मौजूद रहती है। कभी-कभी बस किसी अपने, किसी दोस्त या गुरु की एक याद दिलाने वाली बात चाहिए होती है, ताकि तुम फिर से अपने ऊपर भरोसा कर सको।

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