बच्चों के लिए कहानियाँ

बच्चों की कहानी: भक्त प्रह्लाद का साहस — जब दोस्तों का ग्रुप किसी को तंग करे तो क्या करें

आनंद दुबे ·

रोहन की क्लास में एक नया लड़का आया — अमन। दुबला-पतला, थोड़ा शर्मीला। क्लास के कुछ लड़कों ने उसे तंग करना शुरू कर दिया — टिफिन छीनना, नाम बिगाड़कर बुलाना। एक दिन ग्रुप के सबसे "पावरफुल" लड़के, कबीर ने रोहन से कहा — "हमारे साथ आ, अमन को तंग करने में मज़ा आएगा।" रोहन को अचानक अपनी दादी की सुनाई एक पुरानी कहानी याद आ गई।

प्रह्लाद की कथा

श्रीमद्भागवत पुराण में कथा आती है — राक्षस राजा हिरण्यकश्यप का बेटा प्रह्लाद बचपन से ही भगवान विष्णु का भक्त था। पिता को यह पसंद नहीं था। हिरण्यकश्यप ने बेटे को डराया, दरबारियों से दबाव डलवाया, यहां तक कि उसे कठोर सज़ाएं भी दीं — पर प्रह्लाद ने कभी अपनी सच्चाई और सही राह नहीं छोड़ी। न तो उसने पिता का विरोध किया, न ही गलत राह अपनाई — वह शांति से, दृढ़ता से अपने रास्ते पर टिका रहा।

रोहन ने क्या किया

रोहन ने कबीर से नज़र मिलाकर कहा — "मुझे नहीं आना। अमन ने हमारा क्या बिगाड़ा है?" कबीर ने ताना मारा — "डरपोक है क्या?" रोहन थोड़ा घबराया, पर उसे प्रह्लाद की याद आई — दबाव में भी सही चुनना ही असली हिम्मत है। उसने बस इतना कहा — "मैं तुम्हारे साथ मस्ती में हूं, पर किसी को दुखी करने में नहीं।"

अगले दिन रोहन ने अमन के पास बैठकर उससे बात की, उसका टिफिन शेयर किया। धीरे-धीरे दो-तीन और बच्चे भी उनके साथ जुड़ गए। कबीर का ग्रुप अकेला पड़ गया, और कुछ दिनों बाद वह भी माफी मांगकर सबके साथ शामिल हो गया।

प्रह्लाद की कथा आगे

पुराण कथा में आगे बताया गया है कि हिरण्यकश्यप के डराने-धमकाने का प्रह्लाद पर कोई असर नहीं हुआ — वह न तो डरा, न ही गुस्से में आकर पिता के खिलाफ बगावत की। उसने बस अपने भीतर के विश्वास को मज़बूती से थामे रखा। अंततः, कथा के अनुसार, भगवान विष्णु ने नरसिंह अवतार लेकर प्रह्लाद की रक्षा की। इस कथा को बच्चों को अक्सर डर के मुकाबले साहस की कहानी के रूप में सुनाया जाता है, पर इसका एक और पहलू है — सही राह पर टिके रहने के लिए हमेशा चीखना-चिल्लाना या लड़ना ज़रूरी नहीं, कई बार शांत दृढ़ता ही सबसे बड़ी ताकत होती है।

स्कूल में यह सीख कैसे काम आती है

रोहन जैसी स्थिति लगभग हर बच्चे के सामने कभी न कभी आती है — दोस्तों का दबाव, "सबके साथ चलो वरना अकेले रह जाओगे" वाली सोच। पर प्रह्लाद की कथा यही सिखाती है कि जो सही लगे, उस पर बिना शोर मचाए टिके रहना ही असली मज़बूती है। इससे न सिर्फ अमन जैसे बच्चों को राहत मिलती है, बल्कि धीरे-धीरे सही सोच रखने वाले और साथी भी जुड़ने लगते हैं, जैसा रोहन के साथ हुआ।

सीख

भीड़ के दबाव में बहकने के बजाय जो सही लगे, उस पर शांति और दृढ़ता से टिके रहना — यही असली साहस है, और यही प्रह्लाद की कथा आज भी हमें सिखाती है।

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