बच्चों की कहानी: शबरी का इंतज़ार — आज बार-बार टलते क्रिकेट ट्रायल्स पर भी उम्मीद न छोड़ने वाली लड़की
बच्चों की कहानी आज की है रिया की, जो अपने स्कूल की क्रिकेट टीम में जगह पाना चाहती थी। पर हर बार जब भी सिलेक्शन ट्रायल्स की तारीख आती, कोच किसी न किसी वजह से उसे आगे टाल देते — कभी बारिश की वजह से, कभी टूर्नामेंट शेड्यूल बदलने की वजह से। रिया की सहेलियाँ धीरे-धीरे मैदान छोड़ने लगीं, "अब तो होना ही नहीं है ट्रायल्स" कहकर।
रिया की दादी ने एक दिन उसे थकी-हारी देखकर रामायण की एक पुरानी कथा सुनाई — भक्त शबरी की कथा।
शबरी की प्रतीक्षा
वाल्मीकि रामायण के अनुसार, शबरी माता मतंग ऋषि के आश्रम में रहने वाली एक भीलनी थीं। उनके गुरु ने जाते समय कहा था कि एक दिन स्वयं श्रीराम उनके आश्रम में आएँगे। बरसों बीत गए। शबरी हर सुबह आश्रम की सफाई करतीं, हर दिन जंगल से मीठे बेर चुनकर लातीं — यह सोचकर कि आज राम आ सकते हैं। लोग हँसते, "अब तो बुढ़ापा आ गया, कोई नहीं आने वाला।" पर शबरी न रुकीं, न थकीं।
और आखिर वह दिन आया — वनवास के दौरान श्रीराम और लक्ष्मण सचमुच उसी आश्रम में पहुँचे। शबरी ने अपने जूठे बेर राम को खिलाए, और राम ने बिना किसी हिचक के उन्हें प्रेम से खाया। शास्त्र कहते हैं कि राम ने वहाँ भक्ति के नौ प्रकार (नवधा भक्ति) भी शबरी को समझाए — कि सच्ची भक्ति जाति, उम्र या हैसियत नहीं देखती, बस निष्ठा देखती है।
रिया की सीख
दादी ने कहा, "रिया, शबरी को नहीं पता था राम कब आएँगे, बस इतना पता था कि तैयार रहना है। तू भी हर दिन प्रैक्टिस करती जा, बैट-बॉल से नाता मत तोड़।" रिया हँस पड़ी, "पर दादी, वो तो त्रेतायुग की बात थी!" दादी मुस्कुराईं, "बेटा, धैर्य और भरोसे का नियम हर युग में एक जैसा ही रहता है — बस साधन बदल जाते हैं, बेर की जगह आजकल बैट-पैड आ गए हैं।" रिया को बात समझ आ गई। अगले कुछ हफ्तों में जब भी समय मिलता, वह अकेले ही नेट प्रैक्टिस करती रहती, मोबाइल पर वीडियो देखकर अपनी बैटिंग सुधारती रहती।
आखिरकार तीन महीने बाद अचानक एक दिन कोच ने अनाउंसमेंट की कि कल ही ट्रायल्स होंगे। जो लड़कियाँ प्रैक्टिस छोड़ चुकी थीं, वे घबरा गईं। पर रिया शांत थी — वह तो रोज़ तैयार ही थी। अगले दिन उसने शानदार बैटिंग की और टीम में जगह पक्की कर ली।
सीख
इंतज़ार लंबा हो या रास्ता मुश्किल, तैयारी और भरोसा कभी मत छोड़ो — सही समय पर मेहनत ज़रूर रंग लाती है।
ऐसी ही प्रेरक कहानियाँ पढ़ने के लिए हमारा ब्लॉग देखते रहें। फुलवरिया के मंदिरों में बच्चों के लिए होने वाले कार्यक्रम की जानकारी पाने के लिए रजिस्ट्रेशन ज़रूर करें।