बच्चों के लिए कहानियाँ

बच्चों की कहानी: युधिष्ठिर और यक्ष के सवाल — आज के क्विज़ मुकाबले की सच्ची जीत

आनंद दुबे ·

स्कूल में इंटर-हाउस क्विज़ का फाइनल चल रहा था। आर्यन की टीम एक अंक से पीछे थी, और आखिरी सवाल आना बाकी था। तभी बगल में बैठे दोस्त ने फुसफुसाकर कहा, "जवाब मेरे फोन में है, देख ले!" आर्यन को अचानक याद आई एक कहानी, जो उसकी दादी ने कभी सुनाई थी — महाभारत के वन पर्व की, युधिष्ठिर और यक्ष की कहानी।

जंगल में वह रहस्यमयी झील

वनवास के दौरान पांडव भटकते-भटकते एक जंगल में पहुंचे। प्यास से व्याकुल नकुल पानी की तलाश में एक झील तक गए। झील से एक आवाज़ आई — "पहले मेरे सवालों का जवाब दो, फिर पानी पीना।" नकुल ने आवाज़ को अनसुना कर पानी पिया, और वहीं गिर पड़े। यही हाल सहदेव, अर्जुन और भीम का हुआ। अंत में युधिष्ठिर वहां पहुंचे और देखा — उनके चारों भाई बेसुध पड़े हैं।

यक्ष के सवाल

झील में से एक यक्ष प्रकट हुआ। उसने कहा, "जब तक मेरे प्रश्नों का सही उत्तर नहीं दोगे, पानी नहीं पी सकते।" युधिष्ठिर रुक गए, और एक-एक करके हर सवाल का ईमानदारी से जवाब देने लगे। यक्ष ने पूछा, "संसार में सबसे बड़ा आश्चर्य क्या है?" युधिष्ठिर बोले, "रोज लोग मरते देखते हैं, फिर भी हर कोई सोचता है कि वह अमर है — यही सबसे बड़ा आश्चर्य है।" यक्ष हर उत्तर से प्रसन्न होता गया, क्योंकि युधिष्ठिर ने न कोई जवाब रटा हुआ दिया, न किसी की मदद ली — सिर्फ अपनी समझ और सच्चाई से बोले।

अंत में यक्ष ने खुश होकर कहा, "मांगो, क्या वरदान चाहिए?" युधिष्ठिर ने धन या जीत नहीं मांगी — उन्होंने अपने भाइयों का जीवन मांगा। यक्ष ने प्रसन्न होकर चारों भाइयों को जीवनदान दे दिया और बताया कि वह स्वयं धर्मराज थे, युधिष्ठिर के धैर्य और सच्चाई की परीक्षा ले रहे थे।

आर्यन ने क्या किया

आर्यन ने दोस्त की तरफ देखा और धीरे से कहा, "नहीं यार, जो आता है वही बोलूंगा।" उसने अपने ज्ञान से जवाब दिया — जवाब सही नहीं निकला, टीम वह मुकाबला हार गई। पर मंच से उतरते वक्त टीचर ने सबके सामने कहा, "हार-जीत तो होती रहती है, पर आर्यन ने आज ईमानदारी की असली परीक्षा पास की है।" पूरी क्लास ने तालियां बजाईं — और आर्यन को लगा, यह जीत क्विज़ के अंक से भी बड़ी थी।

सीख: सच्चाई और धैर्य से दिया गया उत्तर, नकल से जीती हुई किसी भी बाज़ी से बड़ा होता है।

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