बच्चों के लिए कहानी: टीम में जगह न मिलने पर ध्रुव जैसा हौसला
आर्यन स्कूल से आते ही बस्ता पटककर कमरे में चला गया। कारण था — सालाना क्रिकेट मैच के लिए टीम बन गई थी, और उसका नाम लिस्ट में नहीं था। कप्तान ने कह दिया था, "अगली बार देख लेंगे।" आर्यन को लगा जैसे दुनिया खत्म हो गई हो।
शाम को दादी उसके पास आईं और बोलीं, "चल, तुझे एक कहानी सुनाती हूँ — एक ऐसे बच्चे की, जिसे उसके ही पिता की गोद से उतार दिया गया था।"
ध्रुव की कहानी (भागवत पुराण से)
यह कहानी है राजा उत्तानपाद के बेटे ध्रुव की। एक दिन छोटा ध्रुव अपने पिता की गोद में बैठना चाहता था, पर उसकी सौतेली माँ सुरुचि ने उसे रोक दिया और कहा कि इस गोद में बैठने का अधिकार केवल उसके अपने बेटे को है। ध्रुव बहुत छोटा था, पर यह बात उसके मन में गहरी उतर गई।
वह रोता हुआ अपनी माँ के पास गया। माँ ने प्यार से समझाया कि दुख में डूबने की बजाय मेहनत से अपना स्थान बनाना ज़्यादा बड़ी बात है। छोटे ध्रुव ने ठान लिया कि वह ऐसा स्थान पाएगा जो कभी कोई छीन न सके। वह वन में गया, और अपनी उम्र से कहीं बड़ा धैर्य दिखाते हुए निरंतर प्रयास और साधना में लगा रहा। उसकी लगन देखकर भगवान विष्णु ने उसे दर्शन दिए और आशीर्वाद दिया। आज भी रात के आकाश में जो सबसे स्थिर तारा दिखता है — ध्रुव तारा — वह उसी बालक के नाम पर है, जो कभी अपनी जगह से नहीं हटता।
दादी की बात
दादी ने आर्यन के सिर पर हाथ फेरते हुए कहा, "टीम में आज जगह नहीं मिली, तो क्या हुआ? रोज़ थोड़ी प्रैक्टिस कर, अगली बार कप्तान खुद तुझे बुलाएगा। जो मेहनत नहीं छोड़ता, उसकी जगह कोई नहीं रोक सकता।"
अगले दिन से आर्यन रोज़ शाम को आधा घंटा गली में गेंदबाज़ी की प्रैक्टिस करने लगा। कुछ हफ्तों बाद जब स्कूल में नई टीम बनी, कप्तान ने खुद उसे बुलाया।
सीख: जो निराशा में हार नहीं मानता और लगातार मेहनत करता है, उसे उसकी सही जगह ज़रूर मिलती है।
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