आज के व्रत-नियम — 11 सितंबर 2026, शुक्रवार: भाद्रपद अमावस्या और देवी उपासना
[समीक्षक हेतु: प्रकाशन से पूर्व किसी प्रामाणिक पंचांग से तिथि-नक्षत्र अवश्य मिलान करें]
आज शुक्रवार है और साथ ही भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष अमावस्या तिथि (सुबह लगभग 08:57 बजे तक) भी है। यह दिन दो परंपराओं को एक साथ लेकर आता है — शुक्रवार की देवी उपासना और अमावस्या का पितृ-स्मरण।
शुक्रवार: देवी उपासना का दिन
परंपरा में शुक्रवार को संतोषी माता और आदिशक्ति देवी की उपासना का दिन माना जाता है।
- सुबह स्नान के बाद देवी को लाल पुष्प, अक्षत और सिंदूर अर्पित करें।
- घी का दीपक जलाकर देवी चालीसा या दुर्गा सप्तशती के पाठ का सामर्थ्य अनुसार पाठ करें।
- संतोषी माता व्रत रखने वाले परंपरा अनुसार खट्टी वस्तुओं का सेवन आज नहीं करते।
- संभव हो तो गुड़ और चने का भोग अर्पित करें, और घर की स्त्रियों-बेटियों का सम्मान करें।
अमावस्या: पितरों के स्मरण का दिन
परंपरा में अमावस्या तिथि को पितरों के तर्पण और स्मरण के लिए उपयुक्त माना गया है।
- प्रातःकाल स्नान के बाद यथासंभव पितरों के निमित्त जल-तर्पण करें।
- किसी ज़रूरतमंद को अन्न, वस्त्र या दक्षिणा का दान करें — परंपरा में इसे पितरों तक पुण्य पहुँचाने का माध्यम माना गया है।
- घर के बड़े-बुज़ुर्गों से पूर्वजों की स्मृतियाँ सुनें और बच्चों को परिवार की जड़ों से जोड़ें।
- कुछ परंपराओं में अमावस्या पर नए बड़े कार्य की शुरुआत टालने की सलाह दी जाती है — यह पूरी तरह क्षेत्रीय व पारिवारिक रीति पर निर्भर करता है, अपने पुरोहित या परिवार-परंपरा से पूछकर ही निर्णय लें।
ध्यान रखें
यह जानकारी सामान्य पारंपरिक मार्गदर्शन है, किसी ज्योतिषीय भविष्यवाणी के रूप में नहीं दी जा रही। व्रत व पूजा-विधि का सही समय और तरीका जानने के लिए अपने परिवार के पुरोहित या किसी प्रामाणिक पंचांग से अवश्य पुष्टि करें।
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