आज के व्रत-नियम

आज के व्रत-नियम — 21 सितंबर 2026, सोमवार: शिव आराधना का दिन

कैलाश नाथ द्विवेदी ·

[समीक्षक हेतु: प्रकाशन से पूर्व किसी प्रामाणिक पंचांग से तिथि-नक्षत्र अवश्य मिलान करें]

आज 21 सितंबर 2026, सोमवार है, और पंचांग के अनुसार आज भाद्रपद शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि है। सोमवार का दिन परंपरा में भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना गया है।

सोमवार व्रत का महत्व

परंपरा में माना जाता है कि सोमवार का दिन भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है। घर-परिवार में सुख-शांति और मन की स्थिरता की कामना से बहुत से श्रद्धालु सोमवार का व्रत रखते हैं। यह व्रत सरल है और घर पर ही पूरी श्रद्धा से किया जा सकता है।

पूजा विधि (संक्षेप में)

  • प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • शिवलिंग या शिव प्रतिमा पर जल, दूध और बेलपत्र अर्पित करें।
  • "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का शांत मन से जाप करें।
  • संभव हो तो संध्या समय शिव चालीसा या शिव आरती का पाठ करें।
  • व्रत रखने वाले फलाहार या एक समय सात्विक भोजन ले सकते हैं, यह प्रत्येक व्यक्ति की श्रद्धा और सामर्थ्य पर निर्भर है।

क्या अपनाएं

  • दिनभर सात्विक और सरल भोजन को प्राथमिकता दें।
  • मन को शांत रखते हुए क्रोध और वाद-विवाद से बचने का प्रयास करें।
  • समय मिले तो निकटतम शिव मंदिर में दर्शन करें।

क्या टालें

  • तामसिक भोजन — जैसे अत्यधिक तला-भुना या मांसाहारी भोजन — परंपरा में वर्जित माना गया है।
  • अनावश्यक क्रोध और अहंकार से बचने की सीख परंपरा में दी गई है।
  • व्रत के दौरान शराब व नशे से पूर्णतः दूर रहें।

कल की तैयारी

आज दशमी तिथि है और कल एकादशी प्रारंभ होगी। जो श्रद्धालु एकादशी व्रत रखते हैं, वे आज रात से ही हल्का भोजन लेकर व्रत की तैयारी शुरू कर सकते हैं — यह परंपरा में शरीर और मन को व्रत के लिए तैयार करने का सरल तरीका माना गया है।

व्रत का पालन हर व्यक्ति अपनी सामर्थ्य और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए ही करें। किसी स्वास्थ्य समस्या की स्थिति में उपवास से पहले सामान्य सावधानी अवश्य बरतें।

घर में सरल पूजा की व्यवस्था

हर घर में शिवलिंग स्थापित होना जरूरी नहीं है। जिनके घर में शिव प्रतिमा या चित्र उपलब्ध न हो, वे किसी निकटवर्ती मंदिर में जाकर भी दर्शन-पूजन कर सकते हैं। परंपरा में माना जाता है कि श्रद्धा और मन की शुद्धता ही पूजा का सबसे बड़ा आधार है, भव्यता उतनी मायने नहीं रखती। बच्चों को भी इस दिन "ॐ नमः शिवाय" मंत्र सिखाना एक अच्छी शुरुआत मानी जाती है, इससे उनमें छोटी उम्र से ही धार्मिक संस्कारों की नींव पड़ती है।

सोमवार व्रत रखने वाले श्रद्धालु अक्सर परिवार के साथ मिलकर शाम को आरती करते हैं, जिससे घर में सामूहिक भक्ति का वातावरण बनता है। यह परंपरा पीढ़ी दर पीढ़ी परिवारों को आपस में जोड़े रखने में भी सहायक मानी जाती है।

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