आज के व्रत-नियम — 14 जुलाई 2026, मंगलवार (भौमवती अमावस्या, आषाढ़)
[समीक्षक हेतु: प्रकाशन से पूर्व किसी प्रामाणिक पंचांग से तिथि-नक्षत्र अवश्य मिलान करें]
आज मंगलवार है और साथ ही आषाढ़ माह की कृष्ण पक्ष अमावस्या भी। तिथि व वार का यह संयोग परंपरा में विशेष माना जाता है, इसलिए आज दो प्रकार के नियम एक साथ देखने लायक हैं।
मंगलवार का पारंपरिक व्रत
प्रत्येक मंगलवार हनुमान जी और मंगल देवता की उपासना का दिन माना जाता है। इस दिन के परंपरागत नियम:
- प्रातः स्नान के बाद हनुमान जी के चित्र या प्रतिमा के समक्ष दीप जलाकर हनुमान चालीसा का पाठ करें।
- जो व्रत रखते हैं, वे परंपरा अनुसार एक समय फलाहार या सादा सात्विक भोजन लेते हैं; तामसिक भोजन व मदिरा का त्याग किया जाता है।
- लाल वस्त्र, सिंदूर और चमेली के तेल का चोला हनुमान जी को अर्पित करने की परंपरा है।
- दिनभर क्रोध और कटु वचन से बचने की कोशिश करें — यह मंगल दोष शांति की सरलतम विधि मानी जाती है।
आषाढ़ अमावस्या: भौमवती अमावस्या का महासंयोग
जब अमावस्या तिथि मंगलवार के दिन पड़ती है, तो परंपरा में इसे "भौमवती अमावस्या" कहा जाता है। "भौम" शब्द मंगल ग्रह का सूचक है, इसलिए इस दिन मंगल देवता और पितरों — दोनों की उपासना का विशेष महत्व माना गया है। आज तिथि दोपहर लगभग 3:14 बजे तक रहेगी।
पितृ-तर्पण की पारंपरिक विधि
- सूर्योदय के बाद, दक्षिण दिशा की ओर मुख करके पितरों के निमित्त जल और काले तिल मिलाकर तर्पण करने की परंपरा है।
- पीपल के वृक्ष में जल अर्पित करना और सायंकाल वहां तेल का दीपक जलाना शुभ माना जाता है।
- सामर्थ्य अनुसार अन्न, वस्त्र या धन का दान इस दिन विशेष फलदायी माना जाता है।
- घर के बड़ों के साथ बैठकर पूर्वजों को स्मरण करना और उनकी स्मृति में कुछ अच्छा करना — यही तर्पण की मूल भावना है।
क्या करें, क्या न करें
- करें: सात्विक भोजन, दान, हनुमान व शिव पूजा, बड़ों का सम्मान।
- न करें: अमावस्या पर नए बड़े कार्यों की शुरुआत, अनावश्यक विवाद, तामसिक भोजन।
परिवार के लिए एक सरल सुझाव
यदि तर्पण की पूरी विधि संभव न हो, तो भी घर के बुजुर्गों के साथ बैठकर पूर्वजों की स्मृतियां साझा करना, उनकी सिखाई बातों को याद करना — यह भी तर्पण की एक सरल और सच्ची भावना मानी जाती है। बच्चों को भी इसमें शामिल करें, ताकि परिवार की जड़ों से उनका जुड़ाव बना रहे।
यह जानकारी परंपरा और सामान्य मान्यताओं पर आधारित है; अपने परिवार की रीति और स्थानीय पुरोहित के परामर्श को सदैव प्राथमिकता दें। अधिक जानकारी और सामुदायिक कार्यक्रमों के लिए हमारे कार्यक्रम पेज देखें, और मंदिरों में दर्शन का लाभ उठाएं।