आज के व्रत-नियम

आज के व्रत-नियम — 9 सितंबर 2026, बुधवार: गणेश पूजा और कृष्ण प्रदोष व्रत

कैलाश नाथ द्विवेदी ·

[समीक्षक हेतु: प्रकाशन से पूर्व किसी प्रामाणिक पंचांग से तिथि-नक्षत्र अवश्य मिलान करें]

आज के व्रत-नियम — बुधवार, 9 सितंबर 2026

आज दो शुभ अवसर एक साथ हैं — सप्ताह का बुधवार, जो गणेश जी की आराधना का दिन माना जाता है, और भाद्रपद कृष्ण त्रयोदशी तिथि, जिस पर प्रदोष व्रत रखे जाने की परंपरा है।

बुधवार: गणेश पूजा का दिन

परंपरा में बुधवार को विघ्नहर्ता गणेश जी की उपासना का दिन माना जाता है। इस दिन सुबह स्नान के बाद स्वच्छ आसन पर बैठकर गणेश जी का ध्यान करना, दूर्वा और मोदक अर्पित करना शुभ माना जाता है। "ॐ गं गणपतये नमः" मंत्र का जाप करना परंपरागत रूप से बुद्धि और बाधाओं के निवारण के लिए किया जाता है।

कृष्ण प्रदोष व्रत

त्रयोदशी तिथि को प्रदोष काल (सूर्यास्त से पहले और बाद के लगभग डेढ़ घंटे) में शिव-आराधना का विशेष महत्व शास्त्रों में बताया गया है। चूंकि यह त्रयोदशी बुधवार को पड़ रही है, तो इसे कुछ परंपराओं में "बुध प्रदोष" भी कहा जाता है, जो बुद्धि और विद्या से जुड़े कार्यों के लिए शुभ माना जाता है।

पूजा विधि (संक्षेप में)

  • प्रदोष काल शुरू होने से पहले स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • शिवलिंग या शिव प्रतिमा पर जल, बेलपत्र और सफेद फूल अर्पित करें।
  • सायंकाल सूर्यास्त के समय दीपक जलाकर "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का जाप करें।
  • व्रत रखने वाले श्रद्धालु दिन में एक समय फलाहार ग्रहण करते हैं, ऐसी परंपरा है।

क्या करें

  • संभव हो तो दिनभर सात्विक और संयमित जीवनशैली अपनाएं।
  • प्रदोष काल में शिव मंदिर जाकर दर्शन-पूजन करना श्रेष्ठ माना जाता है।

क्या टालें

  • तामसिक भोजन (मांस, मदिरा) और अनावश्यक वाद-विवाद से दूर रहें।
  • व्रत के दौरान क्रोध और झूठ बोलने से बचने की सलाह परंपरा में दी जाती है।
  • प्रदोष काल में सोने या अनावश्यक कार्यों में उलझे रहने से बचें, इसे पूजा के लिए समर्पित समय माना जाता है।

चूंकि आज बुधवार और त्रयोदशी दोनों साथ हैं, इसलिए घर में गणेश जी और शिव जी दोनों का स्मरण करना इस दिन को विशेष बना देता है। बच्चों को भी इस अवसर पर सरल शब्दों में इन परंपराओं के पीछे का भाव समझाया जा सकता है।

यह जानकारी सामान्य पारंपरिक मार्गदर्शन है; अपने परिवार की रीति और पंडित जी के परामर्श अनुसार व्रत-विधि में परिवर्तन हो सकता है। हमारे मंदिर पृष्ठ पर पूजा से जुड़े कार्यक्रम देखें, और ऐसी दैनिक जानकारी के लिए रजिस्ट्रेशन करें।

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