आज के व्रत-नियम

आज के व्रत-नियम — 2 अगस्त 2026, रविवार: सूर्य उपासना और संकष्टी चतुर्थी

कैलाश नाथ द्विवेदी ·

[समीक्षक हेतु: प्रकाशन से पूर्व किसी प्रामाणिक पंचांग से तिथि-नक्षत्र अवश्य मिलान करें]

आज 2 अगस्त 2026, रविवार है, और आज श्रावण कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि भी है — यानी आज दो व्रत परंपराएं एक साथ हैं: रविवार का सूर्य व्रत और संकष्टी चतुर्थी का गणेश व्रत।

रविवार — सूर्य उपासना का दिन

परंपरा में रविवार को सूर्य देव की आराधना का दिन माना जाता है। इस दिन सूर्योदय के समय जल अर्पण करना और सूर्य को नमस्कार करना शुभ माना जाता है। शास्त्र कहते हैं कि नियमित सूर्य उपासना से जीवन में तेज और अनुशासन बढ़ता है।

संकष्टी चतुर्थी — गणेश व्रत

आज की चतुर्थी तिथि चंद्रोदय के समय भी बनी रहती है, इसलिए यह संकष्टी चतुर्थी के रूप में मनाई जाती है, जो भगवान गणेश को समर्पित है। वाराणसी में आज चंद्रोदय रात्रि लगभग 9 बजे के आसपास होने का अनुमान है — व्रत का पारण स्थानीय चंद्रोदय समय की पुष्टि करने के बाद ही करें।

परंपरागत नियम

  • व्रत करने वाले सूर्योदय से लेकर चंद्रोदय तक उपवास रखते हैं।
  • फलाहार में सिंघाड़े का आटा, साबूदाना, फल और दूध लेना परंपरा में उचित माना गया है; अनाज से परहेज़ किया जाता है।
  • शाम को गणपति की प्रतिमा या चित्र के सामने दीप जलाकर पूजा करें, दूर्वा घास और मोदक या लड्डू का भोग अर्पित करें।
  • चंद्रोदय होने पर चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत का पारण करने की परंपरा है।

ध्यान रखने योग्य बात

व्रत का पालन अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार करें। बुजुर्ग, बीमार, गर्भवती महिलाएं और बच्चे कठोर उपवास से बचें और फलाहार को हल्का रखें। यह जानकारी परंपरा पर आधारित सामान्य मार्गदर्शन है, किसी भी संशय की स्थिति में स्थानीय पुरोहित से सलाह अवश्य लें।

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