स्वास्थ्य एवं योग

स्वास्थ्य एवं योग: शरद ऋतु में शाम का भोजन जल्दी करें, नींद बनेगी गहरी

सोनी मिश्रा ·

शाम होते ही थाली में गरमागरम खाना और उसके तुरंत बाद बिस्तर — यह आदत शरद ऋतु में सबसे ज़्यादा भारी पड़ती है। दिन छोटे हो रहे हैं, रातें लंबी होने लगी हैं, और शरीर की पाचन-अग्नि इस मौसम में बदलाव मांगती है। आयुर्वेद और सनातन दिनचर्या इसी संतुलन की बात करती है।

ऋतुचर्या: शरद ऋतु का संकेत

भादो के इन दिनों में दिन का तापमान अब भी गर्म रहता है पर सुबह-शाम हवा में हल्की ठंडक घुलने लगी है। परंपरा में माना जाता है कि इस संधिकाल में पित्त दोष स्वाभाविक रूप से बढ़ता है, इसलिए भोजन और दिनचर्या दोनों में हल्का बदलाव सहायक होता है।

सात्विक भोजन में आज ध्यान दें

  • रात का भोजन सूर्यास्त के डेढ़-दो घंटे के भीतर कर लें, ताकि पाचन के लिए पर्याप्त समय मिले।
  • तली-भुनी और अधिक खट्टी चीज़ों की जगह हल्की दाल, मौसमी सब्ज़ी और चावल-रोटी को प्राथमिकता दें।
  • रात में दही की जगह छाछ या गुनगुना पानी लेना परंपरा में अधिक उपयुक्त माना गया है।

आज का अभ्यास: भ्रामरी प्राणायाम

सोने से पहले पाँच मिनट भ्रामरी प्राणायाम मन को शांत करने में सहायक माना जाता है:

  1. रीढ़ सीधी रखकर आराम से बैठें, आँखें बंद करें।
  2. दोनों अंगूठों से कान हल्के से बंद करें, बाकी उंगलियाँ आँखों-माथे पर हल्के से रखें।
  3. गहरी साँस लें, फिर धीरे-धीरे छोड़ते हुए मधुमक्खी जैसी गुनगुनाहट करें।
  4. इसे 5-7 बार दोहराएं।

यह अभ्यास सामान्य विश्राम और बेहतर नींद के लिए परंपरा में सुझाया जाता है; यह किसी चिकित्सा उपचार का विकल्प नहीं है।

क्या अपनाएं, क्या टालें

  • अपनाएं: जल्दी और हल्का रात्रि भोजन, सोने से पहले शांत श्वास अभ्यास।
  • टालें: देर रात भारी भोजन, सोने के तुरंत पहले मोबाइल या तेज़ रोशनी में समय बिताना।

दिनचर्या में एक छोटा बदलाव

परंपरा में सुबह जल्दी उठकर हल्की धूप में कुछ देर टहलना भी शरद ऋतु के लिए उपयोगी माना गया है। इससे शरीर को प्राकृतिक रूप से जागने का संकेत मिलता है और दिनभर की ऊर्जा बेहतर बनी रहती है। साथ ही सुबह गुनगुना पानी पीने की आदत पाचन तंत्र को धीरे-धीरे सक्रिय करने में सहायक मानी जाती है।

याद रखें, यह सारी बातें सामान्य जीवनशैली और परंपरा पर आधारित सुझाव हैं, चिकित्सकीय सलाह नहीं। यदि किसी को कोई विशेष स्वास्थ्य समस्या है, तो योग्य चिकित्सक की सलाह ज़रूर लें।

छोटे-छोटे नियम अपनाकर ही शरीर मौसम के बदलाव के साथ तालमेल बिठा पाता है। सेहत से जुड़े ऐसे और लेख पढ़ने के लिए हमारा ब्लॉग देखें, और मंदिर की शांति में समय बिताने के लिए मंदिर पेज देखें।

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