स्वास्थ्य एवं योग: वर्षा ऋतु में सेतुबंधासन और मूंग-लौकी के हल्के सूप से रखें सेहत का ख्याल
बाहर झमाझम बारिश हो रही हो और मन हो कि कुछ भी खा लें — यही वह समय है जब आयुर्वेद सबसे ज़्यादा सजग रहने को कहता है।
वर्षा ऋतु में शरीर का स्वभाव
आयुर्वेद के अनुसार माना जाता है कि वर्षा ऋतु में जठराग्नि (पाचन शक्ति) स्वाभाविक रूप से कमज़ोर पड़ जाती है, जबकि वात दोष बढ़ने लगता है। यही कारण है कि इस मौसम में भारी, तला-भुना और बासी भोजन जल्दी नुक़सान करने लगता है। परंपरा में इस ऋतु में हल्का, ताज़ा और गरम भोजन लेने की सलाह दी जाती रही है।
आज का योगासन — सेतुबंधासन
सेतुबंधासन (ब्रिज पोज़) रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाने और पाचन अंगों को सक्रिय करने वाला माना जाने वाला सरल आसन है:
- पीठ के बल लेटें, घुटने मोड़ें और पैर ज़मीन पर टिकाएँ।
- साँस भरते हुए कमर को धीरे-धीरे ऊपर उठाएँ, कंधे और सिर ज़मीन पर टिके रहें।
- कुछ सेकंड इसी स्थिति में रुकें, फिर साँस छोड़ते हुए धीरे से नीचे आएँ।
- इसे आराम से 5-6 बार दोहराएँ, जल्दबाज़ी न करें।
जिन्हें गर्दन या कमर में पुरानी तकलीफ़ हो, वे इसे किसी योग-प्रशिक्षक की देखरेख में ही करें।
भोजन में क्या शामिल करें
आज के लिए एक सरल सुझाव — मूंग दाल और लौकी का हल्का सूप। यह जल्दी पचने वाला, हल्का और सात्विक माना जाता है। इसमें थोड़ी हींग, जीरा और हल्का सा अदरक डालने से पाचन में मदद मिलने की परंपरागत मान्यता है। साथ में गरम पानी पीने की आदत बनाए रखें।
क्या नहीं करें
- सड़क किनारे के तले-भुने और बासी खाद्य पदार्थों से दूरी बनाए रखें।
- कच्ची पत्तेदार सब्ज़ियाँ इस मौसम में सीमित मात्रा में ही लें, क्योंकि इनमें मिट्टी और नमी के कारण दोष जल्दी पनपने की आशंका रहती है।
- ठंडा पानी और फ्रिज का बचा-खुचा खाना इस मौसम में टालना बेहतर माना जाता है।
- देर रात भारी भोजन से बचें — रात का भोजन जितना हल्का हो, सुबह उतनी ही ताज़गी महसूस होती है।
दिनचर्या में एक छोटा बदलाव
वर्षा ऋतु में सुबह जल्दी उठकर, नहाकर, हल्के गुनगुने पानी से दिन की शुरुआत करना दिनचर्या का पारंपरिक हिस्सा माना जाता है। भोजन के बीच लंबा अंतराल न रखें और खाने के तुरंत बाद सोने से बचें — इससे पाचन को समय मिलता है। प्राणायाम में आज अनुलोम-विलोम के साथ कुछ मिनट भ्रामरी प्राणायाम भी जोड़ा जा सकता है, इससे मन शांत रहने की परंपरागत मान्यता है।
यह सामान्य पारंपरिक जानकारी है, चिकित्सकीय सलाह नहीं — किसी भी स्वास्थ्य समस्या में चिकित्सक से अवश्य सलाह लें। ऐसे ही सरल स्वास्थ्य लेखों के लिए अन्य लेख देखते रहें, और मंदिर के आगामी सत्संग व योग शिविरों की जानकारी के लिए कार्यक्रम पेज देखें। समुदाय से जुड़ने के लिए रजिस्ट्रेशन कराना न भूलें।