स्वास्थ्य एवं योग

स्वास्थ्य एवं योग: शरद ऋतु की दहलीज़ पर शीतली प्राणायाम और हल्के भोजन से रखें पित्त संतुलित

सोनी मिश्रा ·

सुबह उठते ही अगर गला या आँखों में हल्की जलन महसूस हो, या पेट में गर्मी जैसा लगे, तो यह मौसम बदलने का संकेत है। भादो का महीना बीतते-बीतते वर्षा ऋतु शरद ऋतु को रास्ता दे रही है, और आयुर्वेद की परंपरा में इस संधि-काल में शरीर की खास देखभाल बताई गई है।

ऋतुचर्या: इस समय शरीर में क्या होता है

आयुर्वेद के अनुसार माना जाता है कि वर्षा ऋतु में शरीर में जमा हुआ पित्त, शरद ऋतु आते-आते कुपित होकर बढ़ने लगता है। यही वजह है कि इन दिनों गर्मी, जलन, अपच या चिड़चिड़ापन जैसी शिकायतें बढ़ जाती हैं। परंपरा में इसे "पित्त प्रकोप काल" कहा गया है।

आज का प्राणायाम

सुबह खाली पेट, शांत जगह बैठकर शीतली प्राणायाम करें — जीभ को नली की तरह मोड़कर मुँह से धीरे-धीरे साँस अंदर लें, फिर नाक से छोड़ें। 5-7 बार दोहराएं। इसे परंपरा में शरीर को ठंडक देने वाला अभ्यास माना जाता है। साथ ही अर्ध मत्स्येन्द्रासन जैसा हल्का मेरुदंड-मोड़ आसन पाचन तंत्र को सक्रिय रखने में सहायक बताया गया है। कोई भी आसन करने से पहले किसी योग्य प्रशिक्षक से सीखें, विशेषकर यदि पीठ या घुटने की कोई पुरानी शिकायत हो।

आज का सात्विक भोजन

  • मूंग दाल, लौकी, तोरई, घीया जैसी हल्की और सुपाच्य सब्ज़ियाँ अपनाएं।
  • अधिक तला-भुना, खट्टा और बासी भोजन आज टालें — परंपरा में इसे पित्त बढ़ाने वाला माना गया है।
  • ठंडा मीठा पानी, नारियल पानी या सौंफ का पानी घूँट-घूँट पीना लाभकारी बताया जाता है।
  • रात का भोजन सूर्यास्त के आसपास, हल्का और समय पर करें।

यह जानकारी केवल पारंपरिक जीवनशैली मार्गदर्शन के रूप में दी गई है, चिकित्सीय सलाह के रूप में नहीं। किसी भी स्वास्थ्य समस्या में योग्य चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें।

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