स्वास्थ्य एवं योग

स्वास्थ्य एवं योग: शरद ऋतु की दस्तक — दिनचर्या और सात्विक भोजन से रखें सेहत का ख्याल

सोनी मिश्रा ·

बारिश की झड़ी अब धीरे-धीरे कम होने लगी है और सुबह-शाम हल्की ठंडक भी महसूस होने लगी है। यही वह समय है जब वर्षा ऋतु, शरद ऋतु को रास्ता देना शुरू करती है। आयुर्वेद परंपरा में हर ऋतु-परिवर्तन के साथ दिनचर्या और भोजन में बदलाव करने की सलाह दी जाती है, ताकि शरीर मौसम के साथ तालमेल बिठा सके।

ऋतुचर्या: शरद ऋतु में क्या बदलें

परंपरा में माना जाता है कि वर्षा ऋतु में शरीर में जमा हुई गर्मी और नमी, शरद ऋतु आते ही पित्त दोष को बढ़ा सकती है। इसलिए इस समय ठंडी तासीर वाले और हल्के भोजन को प्राथमिकता देने की सलाह दी जाती है।

  • दिन में समय पर सोना और सूर्योदय से पहले उठना — इसे दिनचर्या का आधार माना गया है।
  • तेज़ धूप में देर तक बाहर रहने से बचना।
  • रात को हल्का और जल्दी भोजन करना।

सात्विक भोजन के सुझाव

आयुर्वेद के अनुसार माना जाता है कि इस मौसम में मीठे, हल्के और ताज़े फल-सब्ज़ियों वाला सात्विक भोजन शरीर के लिए अनुकूल रहता है।

  • चावल, मूंग दाल, घी और मौसमी हरी सब्ज़ियों को भोजन में शामिल करें।
  • अधिक तला-भुना, बासी या बहुत खट्टा भोजन इस समय टालने की सलाह दी जाती है।
  • ताज़ा और गुनगुना पानी पीना लाभकारी माना जाता है, बहुत ठंडा पानी नहीं।
  • मीठे और रसीले मौसमी फल जैसे अनार, सेब को भोजन में सम्मिलित करें।

आज के दिन के लिए योग और प्राणायाम

शरीर को इस बदलते मौसम में संतुलित रखने के लिए हल्के आसन और शीतल करने वाला प्राणायाम उपयोगी माना जाता है।

  • शीतली प्राणायाम: जीभ को मोड़कर सांस अंदर लें, इससे शरीर को ठंडक और मन को शांति मिलती है — ऐसा परंपरागत रूप से माना जाता है।
  • वज्रासन: भोजन के बाद कुछ मिनट इस आसन में बैठना पाचन में सहायक माना गया है।
  • अनुलोम-विलोम: सुबह खाली पेट 5-10 मिनट करने से मन एकाग्र होने में सहायता मिलती है, ऐसा योग परंपरा में कहा जाता है।

इसके अलावा सुबह की सैर या हल्के व्यायाम को दिनचर्या में शामिल करना भी इस मौसम में लाभकारी माना जाता है। परंपरा में कहा जाता है कि ऋतु-संधि के दिनों में — जब एक ऋतु दूसरी को स्थान देती है — शरीर सबसे अधिक संवेदनशील होता है, इसलिए इन दिनों संयम और नियमितता विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जाती है।

ध्यान रखें, यह जानकारी सामान्य पारंपरिक जीवनशैली मार्गदर्शन है, किसी चिकित्सीय सलाह का विकल्प नहीं। किसी भी स्वास्थ्य समस्या में योग्य चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें।

ऐसे ही स्वास्थ्य और जीवनशैली से जुड़े लेखों के लिए हमारा ब्लॉग देखें, और मंदिर से जुड़े कार्यक्रम की जानकारी भी वहाँ मिलेगी। अधिक जुड़ाव के लिए रजिस्ट्रेशन करें।

इस श्रेणी में और लेख

स्वास्थ्य एवं योग: वर्षा ऋतु में भुजंगासन और अदरक-तुलसी काढ़े से रखें सेहत का ख्याल → स्वास्थ्य एवं योग: वर्षा ऋतु में सेतुबंधासन और मूंग-लौकी के हल्के सूप से रखें सेहत का ख्याल → स्वास्थ्य एवं योग: वर्षा ऋतु में दिनचर्या और सात्विक भोजन के सरल नियम →
💬