स्वास्थ्य एवं योग: वर्षा ऋतु में त्रिकोणासन और कपालभाति से रखें शरीर स्फूर्तिवान
बरसात की फुहारों के बीच शरीर में सुस्ती और भारीपन महसूस होना आम बात है। आयुर्वेद में वर्षा ऋतु को खास देखभाल का समय माना जाता है, क्योंकि इस मौसम में पाचन शक्ति स्वाभाविक रूप से कमजोर हो जाती है।
वर्षा ऋतु और शरीर
ऋतुचर्या के अनुसार वर्षा ऋतु में जठराग्नि यानी पाचन की आग मंद पड़ जाती है, जिससे भारी और तला-भुना भोजन जल्दी नहीं पचता। परंपरा में माना जाता है कि इस मौसम में शरीर को हल्का, गर्म और ताज़ा बना भोजन ही सूट करता है।
आज का आसन — त्रिकोणासन
त्रिकोणासन रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाने और शरीर का संतुलन सुधारने में सहायक माना जाता है। इसे करने की सरल विधि:
- पैरों को कंधों से चौड़ा फैलाकर खड़े हों।
- दायां हाथ ऊपर उठाकर धीरे-धीरे शरीर को बाईं ओर झुकाएं और बायां हाथ पिंडली की तरफ ले जाएं।
- कुछ सांस रोककर मूल स्थिति में लौट आएं और दूसरी तरफ से दोहराएं।
जिन्हें कमर या रीढ़ से जुड़ी कोई तकलीफ हो, वे यह आसन किसी योग शिक्षक की सलाह से ही करें।
प्राणायाम — कपालभाति
सुबह खाली पेट कुछ मिनट कपालभाति करने से मन में स्फूर्ति और ताज़गी बनी रहती है, ऐसा परंपरा में माना जाता है। जिन्हें उच्च रक्तचाप, हृदय संबंधी समस्या हो या जो गर्भवती हों, वे इसे किसी योग्य प्रशिक्षक के मार्गदर्शन में ही करें।
सात्विक भोजन
वर्षा ऋतु में मूंग दाल की खिचड़ी, हल्की सब्जियां और गुनगुना पानी पीना परंपरा में लाभकारी माना गया है। कच्चा सलाद और बासी भोजन इस मौसम में टालना बेहतर है, क्योंकि नमी के कारण संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
यह सामान्य जानकारी है, किसी भी स्वास्थ्य समस्या में चिकित्सक की सलाह जरूर लें। योग और सात्विक जीवनशैली से जुड़े और लेख पढ़ने के लिए हमारा ब्लॉग देखें, और आगामी सत्संग व स्वास्थ्य कार्यक्रम की जानकारी पाने के लिए जुड़े रहें।