भजनावली: श्री रामचंद्र कृपालु भजमन — गोस्वामी तुलसीदास की वंदना का भावार्थ
भजनावली में आज हम एक ऐसी वंदना ले आए हैं जो सदियों से हर राम-भक्त की जुबान पर रहती है — गोस्वामी तुलसीदास रचित "श्री रामचंद्र कृपालु भजमन"। यह वंदना मूल रूप से रामचरितमानस के बालकाण्ड की परंपरा से जुड़ी है और आज भी अनेक मंदिरों में सुबह की आरती में गाई जाती है।
गोस्वामी तुलसीदास जी सोलहवीं शताब्दी के महान संत-कवि थे, जिन्होंने अवधी भाषा में रामचरितमानस की रचना कर श्रीराम की कथा को जन-जन तक पहुँचाया। उनकी वंदनाएँ केवल स्तुति नहीं, बल्कि भक्ति और मर्यादा का पाठ भी सिखाती हैं, इसीलिए ये आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं जितनी सदियों पहले थीं।
मूल पाठ
श्री रामचंद्र कृपालु भजु मन हरण भवभय दारुणं।
नवकंज लोचन कंज मुख कर कंज पद कंजारुणं॥कंदर्प अगणित अमित छवि नव नील नीरज सुन्दरं।
पटपीत मानहुं तड़ित रुचि शुचि नौमि जनक सुतावरं॥भजु दीनबंधु दिनेश दानव दैत्यवंश निकंदनं।
रघुनंद आनंदकंद कोसलचंद दशरथ नंदनं॥सिर मुकुट कुण्डल तिलक चारु उदार अंग विभूषणं।
आजानुभुज शर चाप धर संग्राम जित खरदूषणं॥
भावार्थ
तुलसीदास जी कहते हैं — हे मन! उन कृपालु श्रीरामचंद्र का भजन कर, जो संसार के भय और दुखों को हरने वाले हैं। उनके नेत्र कमल के समान हैं, मुख कमल जैसा सुंदर है, और चरण भी कमल के समान कोमल-अरुण हैं। उनकी छवि करोड़ों कामदेवों से भी अधिक सुंदर और नए नीले कमल जैसी मनोहर है। पीले वस्त्र बिजली की तरह चमकते हैं, और वे जनकनंदिनी सीता के पति हैं।
आगे कहा गया है — वे दीनों के बंधु हैं, सूर्यवंश के दीपक हैं, दानवों और दैत्यों के वंश का नाश करने वाले हैं। वे रघुकुल के आनंद-कंद, कोसल के चंद्रमा और राजा दशरथ के पुत्र हैं। उनके सिर पर मुकुट, कानों में कुण्डल और मस्तक पर तिलक शोभा देता है, और उन्होंने संग्राम में खर-दूषण जैसे राक्षसों पर विजय पाई।
प्रसंग और महत्व
यह वंदना केवल राम के रूप-सौंदर्य का वर्णन नहीं, बल्कि उनके करुणा, वीरता और मर्यादा के गुणों का सार भी है। परंपरा में माना जाता है कि सुबह उठकर इस वंदना का पाठ करने से मन में शांति और सकारात्मकता आती है। यही कारण है कि आज भी अनेक घरों और मंदिरों में सुबह की पहली प्रार्थना के रूप में इसे गाया जाता है।
फुलवरिया के मंदिरों में भी ऐसी वंदनाएँ नियमित रूप से गाई जाती हैं। ऐसी ही भजनावली और सद्ग्रंथों की सरल व्याख्या पाने के लिए हमारा ब्लॉग देखते रहें, और मंदिर से जुड़ी हर सूचना पाने के लिए रजिस्ट्रेशन करें। पूजन-सामग्री के लिए हमारा स्टोर भी देखें।