बच्चों की कहानी: मार्कण्डेय का अटूट विश्वास — जब परीक्षा का डर मन पर हावी हो जाए
रोहन की आज बड़ी परीक्षा थी। रात भर वह किताब लिए बैठा रहा, पर डर था कि दिमाग पूरी तरह ब्लैंक हो जाएगा। तभी दादी ने पास बैठकर एक पुरानी कहानी सुनाई — शिव पुराण में आने वाली मार्कण्डेय की कथा, जो आज सावन के पहले दिन याद आना और भी सटीक लगा।
कहानी: जब यम स्वयं सामने आ गए
बालक मार्कण्डेय को पता था कि उसकी आयु बहुत छोटी है। पर वह घबराया नहीं। उसने पूरी लगन से शिवलिंग को गले लगाकर भगवान शिव की आराधना जारी रखी। जब मृत्यु के देवता यम उसे लेने आए, मार्कण्डेय ने पूजा नहीं छोड़ी — डर के आगे झुकने के बजाय वह अपनी भक्ति में डटा रहा। अंततः स्वयं शिव प्रकट हुए और मार्कण्डेय की अडिग निष्ठा से प्रसन्न होकर उसे नई राह दी।
आज के रोहन की कहानी
दादी ने कहा — "रोहन, मार्कण्डेय के पास कोई जादू नहीं था, बस एक चीज़ थी — डर के बावजूद डटे रहना।" रोहन ने रातभर की घबराहट छोड़ी, अगली सुबह शांत मन से परीक्षा हॉल में बैठा। जो सवाल आते थे उन्हें ध्यान से हल किया, जो नहीं आते थे उन पर समय बर्बाद नहीं किया। नतीजा जो भी आए, उसने पूरी लगन से कोशिश की — और यही असली जीत थी।
सीख
डर के सामने भागने की बजाय, पूरी लगन और शांत मन से डटे रहना ही असली साहस है।
ऐसी ही प्रेरक कहानियाँ अपने बच्चों को सुनाते रहें, और सावन के इस पावन महीने में परिवार सहित मंदिर दर्शन के लिए भी समय निकालें। अधिक कहानियों और लेखों के लिए हमारा ब्लॉग देखें।