बच्चों के लिए कहानियाँ

बच्चों की कहानी: नचिकेता की जिज्ञासा — शॉर्टकट नहीं, असली समझ चुनने वाला छात्र

आनंद दुबे ·

अर्जुन नौवीं कक्षा में पढ़ता था, और कल उसकी गणित की परीक्षा थी। व्हाट्सएप पर क्लास ग्रुप में किसी ने प्रश्न-पत्र का "लीक" हुआ फोटो भेज दिया। आधी क्लास उसे रटने में जुट गई। अर्जुन के दोस्त रोहन ने कहा, "अरे यही रट ले, कल पक्का यही आएगा, मेहनत बचेगी!"

अर्जुन थोड़ी देर सोचता रहा। उसे अपने दादाजी की सुनाई एक पुरानी कथा याद आ गई — कठोपनिषद की नचिकेता की कहानी।

नचिकेता की कथा

बहुत समय पहले, एक ऋषि के पुत्र नचिकेता को उसके पिता ने क्रोध में यमराज को दान कर दिया था। नचिकेता यमलोक पहुंचा और तीन दिन द्वार पर प्रतीक्षा करता रहा। जब यमराज लौटे, तो अतिथि को बिना सेवा किए रखने के पश्चाताप में उन्होंने नचिकेता को तीन वरदान मांगने को कहा। पहले दो वरदानों में नचिकेता ने अपने पिता की शांति और यज्ञ-विद्या मांगी। पर तीसरे वरदान में उसने कुछ अनोखा मांगा — "मुझे बताइए, मृत्यु के बाद आत्मा का क्या होता है?"

यमराज चौंक गए। उन्होंने नचिकेता को लालच देना शुरू किया — धन, राज्य, अपार सुख-संपत्ति, लंबी आयु, सब कुछ मांग लो, पर यह प्रश्न छोड़ दो। नचिकेता ने विनम्रता से मना कर दिया। उसने कहा, "यह सब सुख अस्थायी हैं। मुझे वही ज्ञान चाहिए जो सच में स्थायी और सच्चा है।" उसकी दृढ़ता देखकर यमराज ने प्रसन्न होकर उसे आत्मा और ब्रह्म का गहरा ज्ञान दिया।

अर्जुन का फैसला

दादाजी की यह कहानी याद करते ही अर्जुन मुस्कुराया। उसने ग्रुप में लिखा, "मैं वही फोटो नहीं रटूंगा, अपनी तैयारी से ही परीक्षा दूंगा।" रोहन ने हंसी उड़ाई, "बड़ा आदर्शवादी बन रहा है!" पर अर्जुन ने अपनी किताब खोली और ध्यान से हर टॉपिक समझना शुरू किया।

अगले दिन परीक्षा में वह "लीक" हुआ प्रश्न-पत्र गलत निकला — असली पेपर बिल्कुल अलग था। जिन बच्चों ने केवल रटा था, वे घबरा गए। पर अर्जुन ने चैन से हर सवाल हल किया, क्योंकि उसने शॉर्टकट नहीं, समझ चुनी थी।

शाम को जब नतीजे आए, रोहन उदास बैठा था। अर्जुन ने उसे कंधे पर हाथ रखकर कहा, "अगली बार शॉर्टकट नहीं, समझ पर भरोसा करना।" रोहन ने सिर हिलाया — शायद वह भी नचिकेता की सीख अब समझ चुका था।

सीख: जो असली मेहनत से सीखता है, वही हर परीक्षा में — चाहे स्कूल की हो या जीवन की — सिर उठाकर खड़ा रहता है।

ऐसी ही और प्रेरक कहानियां पढ़ने के लिए हमारा ब्लॉग देखें, और परिवार के साथ मंदिर जाने का कार्यक्रम बनाना हो तो कार्यक्रम पेज देखें।

इस श्रेणी में और लेख

बच्चों की कहानी: भगीरथ की गंगा-तपस्या — बार-बार हारने पर भी न रुकने वाली खिलाड़ी → बच्चों की कहानी: ध्रुव जैसा हौसला — जब टीम से नाम कट गया → बच्चों की कहानी: नचिकेता की सच्चाई — जब परीक्षा में शॉर्टकट का लालच आए तो क्या करें →
💬