भागवत कथा

भागवत कथा: श्रीमद्भागवत का मंगलाचरण — जब कथा स्वयं हृदय में भगवान को बुला लाती है

मनोज तिवारी ·

नैमिषारण्य के आश्रम में एक बार ऋषियों ने सूत गोस्वामी से पूछा था — इस संसार में भटके हुए मन के लिए सबसे सरल और सबसे बड़ा कल्याण किस साधन से होगा? इसी प्रश्न के उत्तर में श्रीमद्भागवत महापुराण की कथा आरंभ होती है, और स्वयं इसका पहला श्लोक बताता है कि यह ग्रंथ किस भावना से रचा गया है।

मंगलाचरण श्लोक

"धर्मः प्रोज्झितकैतवोऽत्र परमो निर्मत्सराणां सतां वेद्यं वास्तवमत्र वस्तु शिवदं तापत्रयोन्मूलनम्।
श्रीमद्भागवते महामुनिकृते किं वा परैरीश्वरः सद्यो हृद्यवरुध्यतेऽत्र कृतिभिः शुश्रूषुभिस्तत्क्षणात्॥"
(श्रीमद्भागवत महापुराण, स्कंध 1, अध्याय 1, श्लोक 2)

अर्थ — इस ग्रंथ में जो धर्म बताया गया है, वह हर तरह के छल-कपट और स्वार्थ से रहित, परम शुद्ध है, और उन्हीं संत-जनों के लिए जानने योग्य है जिनके हृदय में किसी के लिए द्वेष नहीं। इसमें बताया गया वास्तविक तत्व शिव यानी कल्याणकारी है, जो तीनों प्रकार के दुखों (आधिदैविक, आधिभौतिक, आध्यात्मिक) को जड़ से मिटा देता है। महामुनि व्यास द्वारा रचित इस श्रीमद्भागवत के अतिरिक्त और साधनों की क्या आवश्यकता — जो कोई भी श्रद्धा और सेवा-भाव से इसे सुनता है, भगवान स्वयं उसके हृदय में तुरंत विराजमान हो जाते हैं।

दूसरा भाव — भक्ति ही परम धर्म

"स वै पुंसां परो धर्मो यतो भक्तिरधोक्षजे। अहैतुक्यप्रतिहता ययात्मा सुप्रसीदति॥" (स्कंध 1, अध्याय 2, श्लोक 6)

अर्थ — मनुष्य के लिए सबसे बड़ा धर्म वही है, जिससे इंद्रियातीत परमात्मा के प्रति भक्ति उत्पन्न हो। यह भक्ति बिना किसी स्वार्थ-कारण के हो और निरंतर बनी रहे, तभी आत्मा को सच्ची तृप्ति और शांति मिलती है।

कथा से आज के लिए सीख

सूत गोस्वामी ऋषियों से कहते हैं कि यह कथा किसी लौकिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि मन की शुद्धि और भगवान के प्रति निष्काम प्रेम जगाने के लिए है। आज के व्यस्त जीवन में भी, यदि परिवार सप्ताह में एक बार बैठकर श्रद्धा से भागवत का एक प्रसंग पढ़ ले या सुन ले, तो यह वही भाव जगाता है जिसकी बात यह मंगलाचरण करता है — बिना किसी दिखावे के, हृदय से जुड़ा धर्म।

ध्यान देने योग्य बात यह भी है कि यहाँ "कैतव" यानी छल-कपट को स्पष्ट रूप से त्यागने की बात कही गई है। अर्थात यह ग्रंथ किसी को डरा-धमकाकर या लालच देकर धर्म की ओर नहीं मोड़ता, बल्कि सहज श्रद्धा और समझ के मार्ग से आत्मा को शांति की ओर ले जाता है। यही कारण है कि श्रीमद्भागवत को भारतीय परंपरा में सबसे उदार और हृदयस्पर्शी ग्रंथों में गिना जाता है।

भागवत कथा और सद्ग्रंथों पर और लेख पढ़ने के लिए हमारा ब्लॉग देखें, और सामूहिक कथा-श्रवण जैसे कार्यक्रम की जानकारी लें।

इस श्रेणी में और लेख

भागवत कथा: गजेंद्र मोक्ष — जब बल से नहीं, समर्पण से मिलती है रक्षा → भागवत कथा: सबसे बड़ा धर्म क्या है — श्रीमद्भागवत का एक मार्गदर्शक श्लोक → भागवत कथा: सृष्टि के आरंभ का मंगलाचरण — श्रीमद्भागवत का पहला श्लोक →
💬