दैनिक ज्ञान: रामचरितमानस की सीख — मेहनत करने वाले को ही मिलता है फल
सुबह-सुबह मन में अक्सर यह विचार आता है — "इतनी मेहनत करके भी क्या होगा, जो किस्मत में है वही मिलेगा।" यही सोच बहुत से लोगों को हाथ-पैर हिलाने से रोक देती है। रामचरितमानस की एक चौपाई इस उलझन का बहुत सीधा उत्तर देती है।
शास्त्र क्या कहते हैं
गोस्वामी तुलसीदास जी ने रामचरितमानस के उत्तरकाण्ड में लिखा है:
"सकल पदारथ एहि जग माहीं। कर्महीन नर पावत नाहीं।।"
अर्थ: इस संसार में सुख, धन, विद्या और सम्मान — हर पदार्थ मौजूद है, कमी किसी वस्तु की नहीं है। पर जो व्यक्ति कर्म नहीं करता, हाथ पर हाथ रखे बैठा रहता है, वह इनमें से कुछ भी नहीं पा सकता। भाग्य वहीं साथ देता है जहाँ प्रयास पहले से चल रहा हो।
आज क्या अपनाएं
- जो काम आज करना है, उसे कल पर मत टालें — छोटा कदम भी आज बढ़ाएं।
- परीक्षा हो, दुकान हो या घर का कोई काम — नतीजा सोचने से पहले पूरी ईमानदारी से जुट जाएं।
- असफलता मिले तो उसे सीख मानें, रुकने का बहाना नहीं।
आज किससे बचें
- "किस्मत में नहीं है" कहकर मेहनत से जी न चुराएं — शास्त्र इसे कर्महीनता कहते हैं।
- दूसरों की सफलता देखकर निराश होने की बजाय अपने प्रयास पर ध्यान दें।
- बिना प्रयास किए जल्दी फल की उम्मीद न रखें — धैर्य भी मेहनत का हिस्सा है।
यही सीख हमारे पूर्वजों ने सदियों से घर-घर में दी है — भगवान भी उसी की मदद करते हैं जो खुद पहला कदम उठाता है। मंदिर के अन्य लेख पढ़कर आप ऐसी और सीखें अपने परिवार के साथ बाँट सकते हैं।
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