दैनिक ज्ञान

दैनिक ज्ञान: कठोपनिषद की सीख — श्रेयस चुनें, प्रेयस नहीं

प्रेमचंद्र दुबे ·

क्या आपने कभी सोचा है कि आसान रास्ता हमेशा सही रास्ता क्यों नहीं होता? कठोपनिषद में बालक नचिकेता और यमराज के बीच हुए संवाद में इसी प्रश्न का सुंदर उत्तर मिलता है, जो आज भी उतना ही काम का है जितना हज़ारों वर्ष पहले था।

कठोपनिषद का संदेश

कठोपनिषद (प्रथम अध्याय, द्वितीय वल्ली, श्लोक 2) में यमराज नचिकेता से कहते हैं:

"श्रेयश्च प्रेयश्च मनुष्यमेतस्तौ सम्परीत्य विविनक्ति धीरः।
श्रेयो हि धीरोऽभि प्रेयसो वृणीते प्रेयो मन्दो योगक्षेमाद् वृणीते॥"

सरल अर्थ: हर मनुष्य के सामने जीवन में दो रास्ते आते हैं — एक जो तुरंत सुखद और आसान लगता है (प्रेयस), और दूसरा जो कल्याणकारी है भले ही उसमें परिश्रम लगे (श्रेयस)। जो बुद्धिमान (धीर) होता है, वह दोनों को ध्यान से परखकर श्रेयस को चुनता है। जो मन का कमज़ोर (मन्द) होता है, वह तुरंत मिलने वाले सुख के पीछे भाग जाता है।

आज के लिए व्यावहारिक सीख

शास्त्र कहते हैं कि यह चुनाव किसी बड़े संकट में नहीं, बल्कि रोज़मर्रा के छोटे-छोटे पलों में होता है — मोबाइल पर एक और वीडियो देखते रहना या ज़रूरी काम पूरा करना, सुबह देर तक सोए रहना या समय पर उठकर दिन शुरू करना, गुस्से में तीखा बोल देना या शांति से जवाब देना। ये सब प्रेयस और श्रेयस के ही रोज़ के उदाहरण हैं।

क्या अपनाएँ

  • कोई भी निर्णय लेने से पहले एक क्षण रुककर सोचें — "इसका आगे चलकर क्या परिणाम होगा?"
  • जो काम कठिन लगे पर सही हो, उसे प्राथमिकता दें, भले ही मन न कर रहा हो।
  • परिवार और समाज के दीर्घकालिक हित को अपने तात्कालिक सुख से ऊपर रखें।

क्या टालें

  • हर निर्णय को केवल "अभी अच्छा लगेगा" के आधार पर न लें।
  • आलस्य और टालमटोल को अपनी आदत मत बनने दें।
  • दूसरों की देखा-देखी में जल्दबाज़ी में फैसले न लें।

नचिकेता ने स्वयं यमराज से मिले वरदानों में सांसारिक सुख-भोग को ठुकराकर आत्मज्ञान का श्रेयस मार्ग चुना था। यमराज ने उन्हें धन, राज्य और दीर्घ जीवन का प्रलोभन भी दिया, पर नचिकेता अपने प्रश्न पर अडिग रहे। यही धैर्य और विवेक हमें अपने रोज़मर्रा के छोटे निर्णयों में भी दिखाना है — चाहे बात पढ़ाई की हो, काम की हो या घर-परिवार की।

बच्चों को भी यह सीख सरल शब्दों में समझाई जा सकती है — जैसे पहले होमवर्क पूरा करना (श्रेयस) या पहले खेलने चले जाना (प्रेयस)। जब यह चुनाव समझ में आने लगता है, तो जीवन के बड़े निर्णय भी आसान हो जाते हैं।

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