दैनिक ज्ञान

दैनिक ज्ञान: संत कबीर के दोहे से सीख — "काल करे सो आज कर" का गूढ़ अर्थ

प्रेमचंद्र दुबे ·

सुबह उठते ही मन में दिन भर के दस काम एक साथ खड़े हो जाते हैं। और अक्सर हम सबसे ज़रूरी काम को यह सोचकर टाल देते हैं कि "कल कर लेंगे, अभी समय है।" संत कबीर ने सदियों पहले इसी आदत पर एक ऐसा दोहा कहा था, जो आज भी उतना ही सटीक बैठता है।

दोहा और उसका सीधा अर्थ

कबीर की साखियों में एक बहुत प्रसिद्ध दोहा है:

"काल करे सो आज कर, आज करे सो अब।
पल में परलय होएगी, बहुरि करेगा कब॥"

सीधा अर्थ है — जो काम तुम कल के लिए टाल रहे हो, उसे आज कर लो; और जो आज के लिए सोच रहे हो, उसे अभी कर लो। कारण सरल है: एक पल में परिस्थिति बदल सकती है, फिर वही काम करने का मौका शायद दोबारा न मिले।

शास्त्र क्या कहते हैं

यह केवल एक अच्छी सलाह नहीं, बल्कि भारतीय परंपरा का एक गहरा सिद्धांत है। शास्त्र कहते हैं कि आलस्य (टालमटोल) मन का सबसे बड़ा शत्रु है — यह छोटे-छोटे अच्छे कामों को भी अनिश्चित काल के लिए रोक देता है। कबीर का यह दोहा हमें समय के महत्व और वर्तमान क्षण में जीने की सीख देता है, जो भागवत गीता की उस भावना से भी मेल खाता है जहाँ निरंतर, सजग कर्म को श्रेष्ठ बताया गया है।

क्या अपनाएं

  • जो काम मन में बार-बार आ रहा है — किसी बुज़ुर्ग से बात करना, किसी की मदद करना, कोई ज़रूरी काम निपटाना — उसे आज ही पूरा करने की कोशिश करें।
  • दिन की शुरुआत में सबसे ज़रूरी काम पहले तय करें, बाकी बाद में।
  • छोटी नेक बातें — क्षमा माँगना, धन्यवाद कहना, सेवा करना — इन्हें कभी "फिर कभी" पर मत छोड़ें।

क्या टालें

  • "अभी समय बहुत है" सोचकर ज़रूरी काम को बार-बार टालना।
  • आलस्य में यह भूल जाना कि समय किसी की प्रतीक्षा नहीं करता।

अगली बार जब मन कहे "कल देख लेंगे", तो एक पल रुककर कबीर का यह दोहा याद कर लीजिए। परिवार के साथ मंदिर जाकर भी इस विचार को साझा किया जा सकता है — मंदिर में सत्संग और कीर्तन के दौरान ऐसी सीखें और गहराई से समझ आती हैं। अगर आप ऐसे विचार नियमित रूप से पाना चाहते हैं, तो रजिस्ट्रेशन करके हमारे समुदाय से जुड़ सकते हैं, और अन्य लेख भी पढ़ सकते हैं।

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