दैनिक ज्ञान

दैनिक ज्ञान: बृहदारण्यक उपनिषद की सीख — अंधकार से प्रकाश की ओर कैसे बढ़ें

प्रेमचंद्र दुबे ·

सुबह जब मन में उलझन हो, कोई फैसला सही लगे या गलत — यह समझ ही न आए, तब ज़्यादातर लोग जल्दबाज़ी में कोई भी राह पकड़ लेते हैं। पर दैनिक ज्ञान की यह शृंखला हमें रोज़ याद दिलाती है कि हमारे शास्त्रों में हर उलझन का जवाब पहले से मौजूद है।

शास्त्र क्या कहते हैं

बृहदारण्यक उपनिषद (1.3.28) का यह मंत्र शायद सबसे अधिक सुना गया, पर सबसे कम समझा गया मंत्र है:

ॐ असतो मा सद्गमय। तमसो मा ज्योतिर्गमय। मृत्योर्मा अमृतं गमय॥

सरल अर्थ: हे प्रभु, मुझे असत्य से सत्य की ओर ले चलो, अंधकार से प्रकाश की ओर ले चलो, और मृत्यु (नश्वरता के मोह) से अमरता (शाश्वत सत्य के बोध) की ओर ले चलो।

यह केवल पूजा में बोलने की पंक्ति नहीं, बल्कि जीवन जीने की दिशा है। "असत्य" यानी वह जो टिकता नहीं — झूठा दिखावा, अधूरी जानकारी पर लिया गया फैसला, या मन का भ्रम। "सत्य" यानी वह जो जांचा-परखा, टिकाऊ और खरा हो।

आज क्या अपनाएं

  • कोई भी फैसला लेने से पहले एक पल रुककर पूछें — "क्या यह जानकारी पूरी और सच्ची है?"
  • जिस काम में मन को हल्कापन और साफ़ दिशा मिले, उसे "प्रकाश" समझें और उस ओर बढ़ें।
  • परिवार या मित्रों से बातचीत में स्पष्टता रखें — अस्पष्टता ही ज़्यादातर झगड़ों की जड़ होती है।

आज क्या छोड़ें

  • अफ़वाह या अधूरी सुनी बात पर आधारित राय बनाना।
  • ऐसा काम टालते रहना जिसे आप भीतर से जानते हैं कि करना ज़रूरी है — यह टालना ही "तमस" है।
  • छोटी हार या असफलता को अंत मान लेना — शास्त्र कहते हैं कि हर अंधकार के बाद प्रकाश निश्चित है।

यह सप्ताह हमारे अन्य लेखों में गुरु पूर्णिमा पर्व की शृंखला भी शुरू हो रही है, जहाँ गुरु के मार्गदर्शन से इसी "अंधकार से प्रकाश" की यात्रा को विस्तार से समझेंगे। अगर आप ऐसे शास्त्र-सम्मत ज्ञान को नियमित पाना चाहते हैं, तो रजिस्ट्रेशन करके हमारे समुदाय से जुड़ सकते हैं, और नज़दीकी मंदिर में दर्शन कर इस सीख को व्यवहार में उतार सकते हैं।

याद रखें — यह मार्गदर्शन परंपरा और शास्त्रों की सीख पर आधारित है, अंतिम निर्णय और विधि-विधान के लिए मंदिर के पुजारी/समिति से परामर्श करें।

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