दैनिक ज्ञान: भज गोविन्दम् की सीख — शब्दों में नहीं, ईश्वर-स्मरण में है असली शांति
दैनिक ज्ञान की आज की सीख आदिगुरु शंकराचार्य के प्रसिद्ध स्तोत्र "भज गोविन्दम्" से है, जिसे मोहमुद्गर भी कहा जाता है। इसकी पहली ही पंक्ति में शंकराचार्य जी कहते हैं:
"भज गोविन्दं भज गोविन्दं, गोविन्दं भज मूढ़मते।
सम्प्राप्ते सन्निहिते काले, नहि नहि रक्षति डुकृञ्करणे॥"
अर्थ: हे मूर्ख मन! गोविंद का भजन कर, गोविंद का भजन कर। जब अंतिम समय आ जाएगा, तब व्याकरण के सूत्र (डुकृञ् करणे जैसे शब्द-नियम) तुझे नहीं बचा पाएंगे। शंकराचार्य जी यहाँ किसी विद्या-विरोधी बात नहीं कह रहे, बल्कि यह चेता रहे हैं कि केवल शब्दों और शास्त्रार्थ में उलझकर अगर हम ईश्वर-स्मरण भूल जाएँ, तो वह ज्ञान अधूरा रह जाता है।
शास्त्र क्या कहते हैं
शास्त्र कहते हैं कि जीवन में पढ़ाई, नौकरी, व्यापार और लोक-व्यवहार सब आवश्यक हैं, परंतु इन सबके बीच थोड़ा समय ईश्वर-स्मरण के लिए निकालना ही असली बुद्धिमानी है। भज गोविन्दम् में आगे कहा गया है कि यौवन, धन और जवानी क्षण भर में बदल जाते हैं, इसलिए जो नित्य है — परमात्मा का नाम — उसी का सहारा लेना चाहिए।
क्या अपनाएँ
- दिन में कुछ मिनट नाम-स्मरण, भजन या मौन प्रार्थना के लिए अवश्य निकालें
- पढ़ाई और काम को पूरी लगन से करें, पर उसमें अहंकार न आने दें
- यह याद रखें कि धन और पद अस्थायी हैं, इसलिए इनके पीछे भागते हुए रिश्ते और शांति न खोएँ
क्या टालें
- केवल दिखावटी ज्ञान या बहस जीतने के लिए शास्त्र-चर्चा करने से बचें
- यह सोचकर स्मरण टालना कि "अभी समय है, बाद में करेंगे" — शास्त्र इसी आदत के प्रति सचेत करते हैं
- धन और यौवन के घमंड में दूसरों को छोटा समझने से बचें
आज के दौर में यह सीख और भी प्रासंगिक हो जाती है, जहाँ हम पढ़ाई, नौकरी और सोशल मीडिया की जानकारी में इतने डूब जाते हैं कि खुद के लिए, अपने परिवार के लिए और ईश्वर-स्मरण के लिए समय ही नहीं निकाल पाते। शंकराचार्य जी का यह संदेश हमें याद दिलाता है कि बाहरी सफलता चाहे जितनी भी मिल जाए, भीतर की शांति के बिना वह अधूरी रहती है।
यह सीख उन सभी के लिए है जो रोज़ की भाग-दौड़ में इतने व्यस्त हो जाते हैं कि दो पल रुककर अपने भीतर झाँकना भूल जाते हैं। फुलवरिया के मंदिरों में सुबह-शाम होने वाली आरती इसी नाम-स्मरण की परंपरा को जीवित रखती है। यदि आप नियमित रूप से ऐसी शिक्षाएँ अपने व्हाट्सऐप पर पाना चाहते हैं, तो रजिस्ट्रेशन करें।
ऐसी ही दैनिक ज्ञान की बातें और सद्ग्रंथों की सरल व्याख्या पढ़ने के लिए हमारा ब्लॉग देखते रहें, और मंदिर के स्टोर से पूजन-सामग्री भी घर बैठे मंगवा सकते हैं।