दैनिक ज्ञान

आज का ज्ञान: चाणक्य नीति की सीख — मेहनत से ही सफलता मिलती है

प्रेमचंद्र दुबे ·

घर में अक्सर बड़े-बुजुर्ग कहते हैं — "बैठे-बैठे कुछ नहीं होता, हाथ-पैर हिलाओ।" यही बात आचार्य चाणक्य ने सदियों पहले चाणक्य नीति में बहुत सुंदर ढंग से कही थी।

श्लोक और अर्थ

चाणक्य नीति का प्रसिद्ध श्लोक है:

"उद्यमेन हि सिध्यन्ति कार्याणि न मनोरथैः।
न हि सुप्तस्य सिंहस्य प्रविशन्ति मुखे मृगाः॥"

अर्थात् — काम मेहनत और उद्यम से सिद्ध होते हैं, केवल इच्छा करने या सपने देखने से नहीं। सोए हुए सिंह के मुख में भी हिरण अपने आप नहीं आ जाते, उसे भी शिकार के लिए उठना और प्रयास करना पड़ता है।

आज के लिए क्या सीख लें

शास्त्र कहते हैं कि जीवन में चाहे विद्यार्थी हों, गृहस्थ हों या व्यापारी — फल पाने के लिए कर्म करना ही एकमात्र रास्ता है। भाग्य और परिश्रम साथ चलते हैं, पर परिश्रम पहले आता है।

  • क्या अपनाएं: आज जो काम टाला जा रहा है, उसे छोटे कदम से ही सही, आज शुरू करें। संकल्प के साथ प्रयास करें, परिणाम की चिंता बाद में करें।
  • क्या छोड़ें: केवल कल्पना करते रहना और हाथ पर हाथ धरे बैठे रहना छोड़ें। बहाने बनाने की आदत से दूर रहें।

यह भी ध्यान रखने योग्य है कि चाणक्य नीति में मेहनत के साथ-साथ सही दिशा और धैर्य पर भी बल दिया गया है। जल्दबाज़ी में किया गया कर्म भी उतना फल नहीं देता, जितना स्थिर मन से किया गया प्रयास देता है।

घर-परिवार में इसका उपयोग

बच्चों को यह सीख सरल शब्दों में समझाई जा सकती है — परीक्षा में अच्छे अंक चाहिए तो पढ़ाई करनी होगी, केवल अच्छे नंबर की कामना करने से पेपर हल नहीं होगा। यही बात नौकरी, व्यापार और घर के कामों पर भी लागू होती है।

मंदिर जाकर आशीर्वाद लेना अच्छी परंपरा है, पर उसके साथ अपने हिस्से का प्रयास करना भी उतना ही ज़रूरी है। अपने नज़दीकी मंदिर में दर्शन के साथ इस सीख को जीवन में उतारने का संकल्प लें।

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