रामचरितमानस से सीख: संकट के समय ही असली परिचय होता है
घर में अचानक कोई मुश्किल आ जाए, नौकरी छूट जाए या स्वास्थ्य बिगड़ जाए — ऐसे समय में इंसान को पता चलता है कि उसके पास असल में क्या बचा है। गोस्वामी तुलसीदास जी ने रामचरितमानस के अयोध्या कांड में इसी सच्चाई को एक ही पंक्ति में समेट दिया है।
चौपाई और उसका भावार्थ
"धीरज धर्म मित्र अरु नारी। आपद काल परखिअहिं चारी॥"
अर्थात् — धैर्य, धर्म, मित्र और परिवार (नारी यहाँ गृहस्थ जीवन के साथी का प्रतीक है) — इन चारों की सच्ची परख विपत्ति के समय में ही होती है। सुख के दिनों में तो सभी साथ खड़े दिखते हैं, पर कठिन समय ही बताता है कि हमारा धैर्य कितना गहरा है, हमारा आचरण कितना सच्चा है, और हमारे रिश्ते कितने मजबूत हैं।
शास्त्र की सीख — क्या अपनाएं
- विपत्ति में भी धैर्य न खोएं — घबराहट में लिया गया निर्णय अक्सर स्थिति और बिगाड़ देता है।
- कठिन समय में भी अपने सिद्धांत और धर्म का साथ न छोड़ें।
- सच्चे मित्र और परिवार को पहचानें और उनका सम्मान करें।
क्या छोड़ें
शास्त्र कहते हैं कि विपत्ति के समय जल्दबाज़ी, क्रोध और निराशा से दूर रहना चाहिए। साथ ही यह भी न भूलें कि जो लोग केवल सुख के समय ही साथ रहते हैं, उन पर आंख मूंदकर भरोसा न करें — पर इसका मतलब यह भी नहीं कि हम खुद किसी का साथ केवल स्वार्थ के लिए निभाएं।
आज के व्यस्त जीवन में यह चौपाई एक आईने की तरह है — हमें बार-बार यह देखने का मौका देती है कि हम कठिन समय में कैसे व्यवहार करते हैं। मंदिर परिसर में जाकर कुछ पल शांति से बैठना और यह चौपाई मन में दोहराना भी संकट के समय बड़ा सहारा दे सकता है।
हमारे मंदिरों में होने वाले सत्संग और पाठ के बारे में जानने के लिए कार्यक्रम पृष्ठ देखें, और नए अपडेट के लिए रजिस्ट्रेशन करें। ऐसे ही और लेखों के लिए हमारा ब्लॉग देखें।