स्वास्थ्य एवं योग

वर्षा ऋतु में आयुर्वेदिक दिनचर्या: बरसात में सेहत का ध्यान कैसे रखें

सोनी मिश्रा ·

बारिश की बूंदें राहत तो देती हैं, पर आयुर्वेद के अनुसार इसी मौसम में शरीर की पाचन अग्नि (जठराग्नि) सबसे कमजोर मानी जाती है। यही वजह है कि वर्षा ऋतु में जरा सी लापरवाही भी भारीपन और सुस्ती का कारण बन जाती है।

ऋतुचर्या: वर्षा ऋतु का महत्व

आयुर्वेद में साल को छह ऋतुओं में बांटा गया है, और वर्षा ऋतु को खान-पान के प्रति सबसे सजग रहने का समय माना जाता है। परंपरा में माना जाता है कि इस मौसम में शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता स्वाभाविक रूप से कम हो जाती है, इसलिए हल्का और सुपाच्य भोजन ही उपयुक्त रहता है।

सात्विक भोजन में क्या अपनाएं

  • गुनगुना और उबला हुआ पानी दिनभर पिएं, ठंडा पानी टालें।
  • मूंग दाल की खिचड़ी, हल्की सब्जियां और ताज़ा बना भोजन प्राथमिकता में रखें।
  • अदरक, हल्दी, काली मिर्च जैसे मसालों का संतुलित उपयोग पाचन में सहायक माना जाता है।
  • भोजन का समय नियमित रखें और पेट भर खाने से बचें, थोड़ा हल्का ही रहें।

क्या टालें

  • कच्ची पत्तेदार सब्जियां और सलाद — इस मौसम में इनमें कीटाणु पनपने की आशंका अधिक रहती है।
  • तला-भुना और भारी भोजन, जो पाचन पर अतिरिक्त बोझ डालता है।
  • बासी भोजन और बाहर का खुला खान-पान।
  • दिन में सोना, जिससे परंपरा में शरीर सुस्त होना माना जाता है।

आज के लिए योग और प्राणायाम

वर्षा ऋतु में जब बाहर टहलना मुश्किल हो, तब घर के भीतर ही हल्का अभ्यास पर्याप्त है:

  • अनुलोम-विलोम प्राणायाम: 5-7 मिनट, यह मन को शांत और श्वास को संतुलित रखने में सहायक माना जाता है।
  • वज्रासन: भोजन के बाद 5 मिनट बैठने से पाचन में सहायता मिलती है, ऐसा परंपरा में माना जाता है।
  • हल्का सूर्य नमस्कार: शरीर को सक्रिय रखने के लिए सुबह धीमी गति से 3-4 चक्र पर्याप्त हैं।

यह सामान्य जानकारी परंपरागत जीवनशैली पर आधारित है, किसी चिकित्सीय सलाह का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या में चिकित्सक से परामर्श लें।

मन की शांति भी उतनी ही जरूरी

शरीर के साथ मन की सात्विकता भी वर्षा ऋतु में संभालनी चाहिए। सुबह कुछ पल शांति से बिताना, दीपक जलाना या पास के मंदिर में जाकर मन को स्थिर करना — यह सब मिलकर सेहत को संतुलित रखता है। ऐसे ही जीवन-उपयोगी लेख नियमित पाने के लिए रजिस्ट्रेशन करें और हमारे अन्य लेख भी देखें।

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