गणेश जी

रामेष्ठ मंदिर

गणेश जी प्रथम पूज्य हैं — राम-दरबार के इस धाम में भी हर पूजा का आरंभ उन्हीं से होता है। यह अधिकार उन्हें कैसे मिला, इसकी कथा भारतीय घर-घर में कही जाती है।

पौराणिक कथा

शिव पुराण के अनुसार एक बार देवताओं में प्रश्न उठा कि प्रथम पूज्य कौन हो। निर्णय हुआ — जो पूरे ब्रह्मांड की परिक्रमा कर सबसे पहले लौटे। सभी देवता अपने वाहनों पर दौड़ पड़े; कार्तिकेय मयूर पर उड़ चले। गणेश जी ने अपने माता-पिता — शिव और पार्वती — की तीन परिक्रमा की और हाथ जोड़कर खड़े हो गए: "माता-पिता में ही संपूर्ण ब्रह्मांड है।" उत्तर की गहराई पर सब नतमस्तक हुए, और गणेश जी अग्रपूज्य घोषित हुए। यह कथा बुद्धि की श्रेष्ठता और माता-पिता की महिमा — दोनों का शाश्वत पाठ है।

आध्यात्मिक महत्व

गणपति बुद्धि, विवेक और आरंभ के देवता हैं — 'श्री गणेश करना' मुहावरा ही शुभारंभ का पर्याय बन गया है। उनकी उपासना का मर्म है: हर कार्य से पहले विवेक को प्रणाम करो, विघ्न स्वयं हट जाएँगे। रिद्धि-सिद्धि उनके साथ रहती हैं — अर्थात जहाँ विवेक है, वहीं समृद्धि और सफलता है।

उपासना विधि

बुधवार और चतुर्थी गणेश-आराधना के दिन हैं; भाद्रपद की गणेश चतुर्थी प्रमुख पर्व है। दूर्वा की 21 गाँठें, मोदक/लड्डू और सिंदूर प्रिय अर्पण हैं। मंत्र: ॐ गं गणपतये नमः। किसी भी पूजा का आरंभ यहाँ इसी मंत्र से होता है — यही 'श्री गणेश' है।

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