दुर्गा जी

मालिहवीरबाबा मंदिर

माँ दुर्गा आदिशक्ति हैं — वह ऊर्जा जिससे सृष्टि का सृजन, पालन और संहार तीनों संचालित होते हैं। 'दुर्गा' का अर्थ है — जो दुर्गम है, जिसे पाना कठिन है; और भक्तों के लिए इसका अर्थ है — जो हर दुर्गति से पार लगाती है।

पौराणिक कथा

दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) की केंद्रीय कथा महिषासुर-मर्दिनी की है। जब महिषासुर के अत्याचार से तीनों लोक त्रस्त हुए और कोई देवता उसे परास्त न कर सका, तब सभी देवताओं के तेज से देवी प्रकट हुईं — शिव का त्रिशूल, विष्णु का चक्र, इंद्र का वज्र लेकर। नौ दिनों के घोर युद्ध के बाद दसवें दिन देवी ने महिषासुर का वध किया। यह कथा घोषणा है कि अधर्म कितना भी प्रबल हो, शक्ति के समक्ष उसका अंत निश्चित है।

आध्यात्मिक महत्व

देवी-उपासना भारतीय संस्कृति की वह धारा है जो परमात्मा को माँ के रूप में देखती है — जगत की पालनहार, क्षमामयी, पर अन्याय के विरुद्ध चंडी। साधक के भीतर का महिषासुर — काम, क्रोध, अहंकार — ही वास्तविक असुर है, और दुर्गा-साधना उसी के विरुद्ध आंतरिक युद्ध है।

उपासना विधि

नवरात्रि — चैत्र और शारदीय — देवी-आराधना के प्रमुख पर्व हैं, जिनमें कलश स्थापना, दुर्गा सप्तशती पाठ और कन्या पूजन का विधान है। शुक्रवार देवी का प्रिय दिन माना जाता है; लाल पुष्प और नारियल अर्पित करने की परंपरा है। मंत्र: "सर्वमंगलमांगल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥"

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